Iran Protests: खामेनेई का ट्रंप पर सीधा हमला: 'अमेरिकी राष्ट्रपति जनता के हत्यारे'
Iran Protests - खामेनेई का ट्रंप पर सीधा हमला: 'अमेरिकी राष्ट्रपति जनता के हत्यारे'
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है, उन्हें हालिया विरोध प्रदर्शनों में हुई हिंसा और जानमाल के नुकसान के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. खामेनेई ने ट्रंप को 'अपराधी' करार दिया और चेतावनी दी कि ईरान अपने देश के खिलाफ किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय साजिशकर्ता को बख्शेगा नहीं. यह बयान ईरान में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक संकट के बीच आया है, जिसने देश को हफ्तों से घेरा हुआ है.
ट्रंप पर सीधा आरोप
अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अपने बयानों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'जनता का हत्यारा' और 'अपराधी' बताया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और देश को भारी नुकसान हुआ, उसके पीछे ट्रंप का हाथ था. खामेनेई के अनुसार, ट्रंप ने न केवल ईरान के खिलाफ एक बड़ी साजिश रची, बल्कि. उन्होंने सक्रिय रूप से हिंसा को बढ़ावा दिया और अशांति फैलाई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई. यह आरोप ईरान की सरकारी मीडिया द्वारा भी प्रमुखता से प्रसारित किए गए हैं, जो इस बात पर जोर देते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत रूप से इन घटनाओं में हस्तक्षेप किया.अमेरिकी साजिश का दावा
ईरानी सर्वोच्च नेता ने दावा किया कि हालिया विरोध प्रदर्शन पहले की घटनाओं से. बिल्कुल अलग थे, क्योंकि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति खुद खुलकर इसमें शामिल हो गए थे. खामेनेई ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ न केवल एक विस्तृत साजिश रची, बल्कि उसने सीधे तौर पर हिंसा को हवा दी, जिसके परिणामस्वरूप हजारों लोगों की जान गई और देश को भारी आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ा. उनके अनुसार, यह एक सुनियोजित प्रयास था जिसका उद्देश्य ईरान को अस्थिर करना और उसकी संप्रभुता को कमजोर करना था. खामेनेई ने इस 'अमेरिकी उकसावे' को ईरान को 'निगल जाने' की कोशिश करार दिया.साजिशकर्ताओं को चेतावनी
खामेनेई ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयानों में स्पष्ट किया कि हालिया अशांति अमेरिकी उकसावे का सीधा परिणाम थी, जिसका मुख्य मकसद ईरान को पूरी तरह से अपने कब्जे में लेना था. उन्होंने दृढ़ता से कहा कि ईरानी राष्ट्र ने इस बड़ी साजिश की 'कमर तोड़ दी है' और अब समय आ गया है कि इस साजिश में शामिल 'साजिशकर्ताओं की भी कमर तोड़ी जाए' और खामेनेई ने यह भी साफ किया कि ईरान किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग देश के खिलाफ काम कर रहे हैं या साजिश रच रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें उनके किए की सजा जरूर मिलेगी.3000 से अधिक मौतों का आरोप
मानवाधिकार संगठनों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए, खामेनेई ने एक चौंकाने. वाला दावा किया कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान 3,000 से अधिक लोग मारे गए हैं. उन्होंने इन मौतों और व्यापक हिंसा के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल से जुड़े तत्वों को जिम्मेदार ठहराया. खामेनेई ने आरोप लगाया कि इन तत्वों ने सुनियोजित तरीके से सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और निर्दोष लोगों की जान ली, जिससे देश में अराजकता और भय का माहौल पैदा हुआ. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिकी साजिश के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के अपराधियों को उनके जघन्य कृत्यों के लिए निश्चित रूप से सजा मिलेगी.आर्थिक संकट से शुरू हुआ आंदोलन, हिंसा में बदला
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई थी, जब देश के आर्थिक हालात के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई थी. ईरानी मुद्रा डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जिससे आम लोगों का जीवन दूभर हो गया था. तेहरान में दुकानदारों और बाजार व्यापारियों ने इस आर्थिक संकट के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी थी. धीरे-धीरे, ये प्रदर्शन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जल्द ही ये सरकार विरोधी आंदोलन में तब्दील हो गए, जिसमें सरकार की नीतियों और नेतृत्व के खिलाफ व्यापक असंतोष व्यक्त किया गया.इंटरनेट बंद और मौजूदा हालात
विरोध प्रदर्शनों के दौरान, ईरानी सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और सूचना के प्रसार को रोकने के लिए लगभग आठ दिनों तक इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया था. इस कदम से देश भर में संचार बाधित हो गया और प्रदर्शनकारियों के लिए संगठित होना मुश्किल हो गया. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इंटरनेट गतिविधियों में बेहद मामूली सुधार देखा गया है, लेकिन सेवाएं अभी भी पूरी तरह से बहाल नहीं हुई हैं. हालांकि सड़कों पर फिलहाल शांति दिख रही है, लेकिन भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों. के चलते माहौल अब भी बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है, जिससे भविष्य में और अशांति की आशंका बनी हुई है.