कोटद्वार में मोहम्मद दीपक गिरफ्तार, व्यापारी से मारपीट और धमकी देने का आरोप

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कोटद्वार में मोहम्मद दीपक गिरफ्तार, व्यापारी से मारपीट और धमकी देने का आरोप
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के अंतर्गत आने वाले कोटद्वार क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया पर चर्चित जिम संचालक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दीपक कुमार, जिन्हें सोशल मीडिया पर मोहम्मद दीपक के नाम से जाना जाता है, की गिरफ्तारी एक स्थानीय व्यापारी की शिकायत के बाद हुई है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोटद्वार के निवासी और व्यवसायी संजीव टोंक ने कोतवाली में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि दीपक कुमार ने उनके साथ न केवल अभद्रता और गाली-गलौज की, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

शिकायत और पुलिस की प्रारंभिक जांच

व्यापारी संजीव टोंक द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू की। जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को अपने कब्जे में लिया। इसके अलावा, पुलिस ने मौके से अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य और तस्वीरें भी जुटाईं ताकि मामले की सच्चाई का पता लगाया जा सके। जांच के शुरुआती चरणों में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता को अपशब्द कहे गए थे और उसे शारीरिक चोट पहुंचाने के साथ-साथ जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

शुरुआत में पुलिस ने इस मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) और धारा 352 के तहत दर्ज किया था। धारा 351(2) आपराधिक धमकी से संबंधित है, जबकि धारा 352 शांति भंग करने के उद्देश्य से जानबूझकर किए गए अपमान के लिए लगाई जाती है। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी और नए साक्ष्य सामने आए, पुलिस ने मामले में और भी गंभीर धाराएं जोड़ दीं और इसमें धारा 196 को शामिल किया गया, जो धर्म या जाति के आधार पर वैमनस्य फैलाना या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से संबंधित है। इसके साथ ही धारा 115 भी जोड़ी गई, जो जानबूझकर स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के अपराध के लिए है।

BNSS की धारा 170 के तहत गिरफ्तारी और फ्लैग मार्च

क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता थी और आरोपी की गतिविधियों और क्षेत्र में संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 का उपयोग किया। इस धारा के तहत पुलिस को यह अधिकार है कि वह किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए गिरफ्तारी कर सकती है। इसी के तहत दीपक कुमार को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद शहर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाए।

सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और जनता के बीच विश्वास पैदा करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने देर शाम कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में एक फ्लैग मार्च निकाला। इस फ्लैग मार्च के जरिए पुलिस ने यह संदेश दिया कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी शहर की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारी पुलिस बल की मौजूदगी ने स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को सुरक्षा का अहसास कराया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

मोहम्मद दीपक के चर्चित होने का घटनाक्रम

दीपक कुमार के मोहम्मद दीपक बनने और चर्चा में आने की कहानी काफी दिलचस्प है। स्रोत के अनुसार, वह इस साल जनवरी 2026 में उस समय देशभर की सुर्खियों में आए थे, जब कोटद्वार में एक विवाद उत्पन्न हुआ था। विवाद एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर था, जिसमें बाबा शब्द का इस्तेमाल किया गया था। कुछ स्थानीय लोगों ने इस नाम पर कड़ा विरोध जताया था और उस समय दीपक कुमार ने आगे आकर उस बुजुर्ग दुकानदार का समर्थन किया था और विरोध करने वाले लोगों के साथ उनकी तीखी बहस हुई थी।

इसी बहस के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया था। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद वे रातों-रात प्रसिद्ध हो गए। तब से उन्हें इसी नाम से पहचाना जाने लगा। हालांकि, वर्तमान में उन पर लगे मारपीट और धमकी के आरोपों ने उन्हें फिर से विवादों के केंद्र में ला दिया है। पुलिस अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर रही है और सभी जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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