इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के एक रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। इस मैच के असली नायक के रूप में क्रुणाल पंड्या उभरकर सामने आए, जिन्होंने न केवल बल्ले से तबाही मचाई बल्कि शारीरिक पीड़ा को मात देते हुए अपनी टीम को जीत की दहलीज तक पहुँचाया। क्रुणाल पंड्या ने मुंबई इंडियंस के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ मात्र 46 गेंदों में 73 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी के दम पर ही बेंगलुरु की टीम आखिरी गेंद पर जीत दर्ज करने में सफल रही। हालांकि, मैच के समापन के बाद एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब क्रुणाल पंड्या के बजाय भुवनेश्वर कुमार को दिया गया, जिसे लेकर क्रिकेट जगत में काफी चर्चा हो रही है।
प्लेयर ऑफ द मैच पर छिड़ी बहस
मैच खत्म होने के बाद जब पुरस्कारों की घोषणा हुई, तो भुवनेश्वर कुमार को 'जीत का हीरो' चुना गया। भुवनेश्वर कुमार ने निश्चित रूप से शानदार गेंदबाजी की और मुंबई इंडियंस के चार महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। उनके शिकार बनने वाले खिलाड़ियों में रायन रिकल्टन, रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा जैसे दिग्गज शामिल थे। इसके अलावा, भुवनेश्वर ने अंतिम ओवर में एक महत्वपूर्ण छक्का भी जड़ा जिसने मैच का रुख पलटने में मदद की। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर की पिच की परिस्थितियों को देखते हुए क्रुणाल पंड्या का दावा अधिक मजबूत था और रायपुर की पिच पूरी तरह से गेंदबाजों के अनुकूल थी, जहाँ रन बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था, और ऐसी स्थिति में क्रुणाल की पारी किसी चमत्कार से कम नहीं थी।
कठिन परिस्थितियों में क्रुणाल का संघर्ष
क्रुणाल पंड्या की इस पारी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने यह रन तब बनाए जब टीम के अन्य बड़े सितारे पूरी तरह विफल साबित हुए। विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, कप्तान रजत पाटीदार और टिम डेविड जैसे आक्रामक बल्लेबाज रायपुर की पिच पर टिकने में नाकाम रहे और ऐसे समय में क्रुणाल ने जिम्मेदारी संभाली और 5 छक्कों व 4 चौकों की मदद से स्कोरबोर्ड को गति दी। उनकी बल्लेबाजी ने यह साबित कर दिया कि वह दबाव की स्थिति में कितने परिपक्व खिलाड़ी हैं। गेंदबाजों के लिए मददगार इस पिच पर जहाँ अन्य बल्लेबाज संघर्ष कर रहे थे, वहां क्रुणाल ने मुंबई के गेंदबाजों की जमकर खबर ली और टीम को एक सम्मानजनक स्थिति में पहुँचाया।
चोट के बावजूद मैदान पर डटे रहे क्रुणाल
क्रुणाल पंड्या की पारी केवल रनों के लिए नहीं, बल्कि उनके जज्बे के लिए भी याद रखी जाएगी। बल्लेबाजी के दौरान दीपक चाहर की एक तेज शॉर्ट गेंद सीधे उनके पेट पर जा लगी, जिससे वह काफी दर्द में दिखे। इसके तुरंत बाद उनके पैरों की मांसपेशियों में भी खिंचाव (Muscle Pull) आ गया, जिसके कारण उनका चलना और दौड़ना तक दूभर हो गया था। शारीरिक कष्ट के बावजूद क्रुणाल ने मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया और टीम के हित में क्रीज पर डटे रहने का फैसला किया। उनकी इस हिम्मत ने बेंगलुरु के खेमे में जोश भर दिया और उन्होंने दर्द को भुलाकर बड़े शॉट्स खेलना जारी रखा।
अल्लाह गजनफर के खिलाफ अंतिम प्रहार
मैच के 18वें ओवर में क्रुणाल पंड्या का रौद्र रूप देखने को मिला। उन्होंने अल्लाह गजनफर की तीसरी गेंद पर एक गगनचुंबी छक्का जड़ा और फिर पांचवीं गेंद को भी सीमा रेखा के पार भेजकर अपना दूसरा छक्का लगाया। हालांकि, इसी ओवर की आखिरी गेंद पर वह आउट होकर पवेलियन लौट गए, लेकिन तब तक वह अपना काम कर चुके थे। क्रुणाल की इस साहसी पारी की बदौलत ही बेंगलुरु ने अंतिम गेंद पर रोमांचक जीत हासिल की। भले ही आधिकारिक तौर पर भुवनेश्वर कुमार को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, लेकिन प्रशंसकों की नजर में क्रुणाल पंड्या ही इस जीत के असली हकदार थे, जिन्होंने चोटिल होने के बावजूद हार नहीं मानी और अंत तक संघर्ष किया।