विज्ञापन

जवाद जरीफ के कथित मैसेज लीक, यूएई और इजराइल पर हमले का सुझाव

जवाद जरीफ के कथित मैसेज लीक, यूएई और इजराइल पर हमले का सुझाव
विज्ञापन

ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ के कथित निजी संदेशों के लीक होने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है और एक निजी टेलीग्राम समूह से प्राप्त इन संदेशों में जरीफ ने ईरान की भविष्य की रणनीतियों, विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इजराइल और अमेरिका के प्रति देश के रुख पर विस्तार से चर्चा की है। इन संदेशों के अनुसार, जरीफ ने ईरान को सलाह दी है कि वह पूरे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष के बजाय विशिष्ट और रणनीतिक लक्ष्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करे। हालांकि, इन लीक हुए संदेशों की सत्यता की अभी तक किसी भी आधिकारिक ईरानी सूत्र या स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

रणनीतिक सैन्य लक्ष्यों की पहचान

लीक हुए संदेशों में मोहम्मद जवाद जरीफ ने कथित तौर पर ईरान को अमेरिकी और इजराइली हितों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का सुझाव दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों (Naval Vessels) और इजराइल से जुड़े महत्वपूर्ण आर्थिक और सामरिक हितों को निशाना बनाने की बात कही है। जरीफ के अनुसार, ईरान को अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन इस तरह करना चाहिए जिससे एक वास्तविक प्रतिरोध (Deterrence) पैदा हो सके। उन्होंने सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाले किंग फहद कॉजवे (पुल) को भी एक संभावित लक्ष्य के रूप में उल्लेख किया है, ताकि क्षेत्रीय समीकरणों में ईरान की स्थिति मजबूत हो सके।

यूएई और इजराइल के प्रति दृष्टिकोण

इन संदेशों में जरीफ ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कथित तौर पर यूएई को इजराइल के समान ही ईरान का प्रमुख शत्रु करार दिया है। जरीफ का तर्क है कि ईरान को पूरे मध्य पूर्व में अंधाधुंध हमले करने के बजाय केवल उन लक्ष्यों को चुनना चाहिए जिनका रणनीतिक प्रभाव गहरा हो। उन्होंने यूएई और इजराइल के बीच बढ़ते संबंधों को ईरान की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में पेश किया है और सुझाव दिया है कि इन दोनों देशों के साझा हितों पर प्रहार करना ईरान के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनीति

अमेरिकी राजनीति के संदर्भ में जरीफ ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर टिप्पणी की है। संदेशों के अनुसार, जरीफ का मानना है कि ट्रंप तकनीकी और लंबी योजनाओं के लिए धैर्य नहीं रखते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ईरान को अमेरिका को एक 'सम्मानजनक निकास' (Honorable Exit) का अवसर देना चाहिए और मध्यस्थता के प्रस्तावों को पूरी तरह से खारिज नहीं करना चाहिए। जरीफ ने दावा किया कि उन्होंने युद्ध को रोकने के लिए कई प्रतीकात्मक कदमों का सुझाव दिया था, जिससे ट्रंप को अपनी जीत का अहसास हो सके, लेकिन उनके इन प्रस्तावों पर ईरानी नेतृत्व द्वारा विचार नहीं किया गया।

धार्मिक अपील और विवादास्पद दावे

लीक हुए संदेशों में केवल सैन्य रणनीति ही नहीं, बल्कि धार्मिक और कुछ विवादास्पद दावे भी शामिल हैं। जरीफ ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक हार के लिए सामूहिक प्रार्थनाओं का आह्वान किया है और उन्होंने एक चीनी भविष्यवक्ता की भविष्यवाणी का भी जिक्र किया है जिसमें ट्रंप की विफलता की बात कही गई थी। संदेशों में ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की योजनाओं को 'शैतानी साजिश' करार देते हुए उन्हें विफल करने के लिए बार-बार नमाज पढ़ने और धार्मिक अनुष्ठानों पर जोर दिया गया है। यह पहलू जरीफ की रणनीतिक सोच में धार्मिक विचारधारा के प्रभाव को दर्शाता है।

आंतरिक जनमत और सार्वजनिक विश्वास

पूर्व विदेश मंत्री ने ईरान के आंतरिक मोर्चे पर जनता के विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे केवल बयानबाजी करने के बजाय ठोस कार्यों के माध्यम से जनता का दिल जीतें। जरीफ के अनुसार, सरकार को किसी विशेष राजनीतिक समूह की मांगों को पूरा करने के लिए आम जनता को उकसाने से बचना चाहिए और उन्होंने चेतावनी दी कि आंतरिक स्थिरता के बिना बाहरी मोर्चे पर कोई भी सैन्य या कूटनीतिक जीत स्थायी नहीं हो सकती। इन संदेशों ने ईरान के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेदों और भविष्य की चुनौतियों को उजागर किया है।

विज्ञापन