संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन की कार्यवाही में भारी व्यवधान देखने को मिला। लोकसभा अध्यक्ष के आसन की ओर कागज उछालने और अमर्यादित आचरण करने के आरोप में 8 सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। निलंबित होने वाले सांसदों में 7 सदस्य कांग्रेस पार्टी से हैं, जबकि 1 सदस्य माकपा (CPM) से संबंधित है। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
निलंबित सांसदों की सूची में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, अमरिंदर राजा वड़िंग, हिबी ईडन, किरन रेड्डी, प्रशांत पोडोले और डीन कोरियाकोस शामिल हैं। इनके साथ ही माकपा के एस. वेंकटेशन को भी सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से बाहर कर दिया गया है। संसदीय कार्य मंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को सदन ने ध्वनि मत से मंजूरी दी, जिसके बाद यह निलंबन प्रभावी हुआ।
सांसदों के निलंबन की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया
संसद में पीठासीन अधिकारी का प्राथमिक उत्तरदायित्व सदन को सुचारू रूप से संचालित करना होता है। लोकसभा की नियम पुस्तिका के नियम 373 के अनुसार, यदि अध्यक्ष को लगता है कि किसी सदस्य का आचरण अत्यंत अव्यवस्थित है, तो वह उसे तुरंत सदन से बाहर जाने का निर्देश दे सकते हैं। यदि सदस्य बार-बार निर्देशों की अवहेलना करता है, तो नियम 374 लागू किया जाता है। नियम 374 के तहत, अध्यक्ष उस सदस्य का नाम ले सकते हैं जो जानबूझकर सदन के कामकाज में बाधा डालता है। इसके बाद सदन में एक प्रस्ताव लाया जाता है, जिसके पारित होने पर सदस्य को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जा सकता है। राज्यसभा में भी इसी तरह के प्रावधान नियम 255 और 256 के तहत दर्ज हैं।
निलंबन के बाद छिनने वाले प्रमुख विधायी अधिकार
एक बार निलंबित होने के बाद, सांसद के कई महत्वपूर्ण अधिकार और विशेषाधिकार तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाते हैं। निलंबित सांसद संसद के कक्ष (Chamber) में प्रवेश नहीं कर सकता है। वह सदन की किसी भी चर्चा, बहस या मतदान प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार खो देता है। इसके अतिरिक्त, निलंबित सदस्य को संसदीय समितियों की बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निलंबन की अवधि के दौरान सांसद सरकार से प्रश्न पूछने (Question Hour) के अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते और न ही उनके द्वारा दिए गए नोटिसों पर विचार किया जाता है।
निलंबन की अवधि और बहाली के नियम
निलंबन की अवधि आमतौर पर उस विशेष दिन के लिए या पूरे सत्र की शेष अवधि के लिए होती है। वर्तमान मामले में, सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया गया है। इसका अर्थ है कि सत्र की समाप्ति के साथ ही उनका निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा। हालांकि, यदि सदन चाहे तो निलंबन को समय से पहले भी वापस ले सकता है। इसके लिए सदन में एक नया प्रस्ताव पेश करना होता है, जिसे बहुमत से पारित होना अनिवार्य है। यदि अध्यक्ष या सभापति संतुष्ट होते हैं, तो सदस्य की सदन में वापसी संभव हो पाती है।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और संसदीय प्रभाव
संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, निलंबन की कार्रवाई सदन की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए एक आवश्यक उपकरण है, लेकिन यह विपक्षी प्रतिनिधित्व को भी प्रभावित करती है। विश्लेषकों का मानना है कि जब बड़ी संख्या में सांसद निलंबित होते हैं, तो विधायी चर्चाओं में विविधता की कमी आ सकती है। हालांकि, पीठासीन अधिकारियों का तर्क रहता है कि सदन की कार्यवाही को बाधित करना और आसन का अपमान करना संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा के विरुद्ध है। इस कार्रवाई का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना और विधायी कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करना होता है।
निष्कर्षतः, 8 सांसदों का निलंबन बजट सत्र की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। जहां सरकार इसे अनुशासन की कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास करार दे रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आगामी दिनों में सदन की कार्यवाही सामान्य हो पाती है या गतिरोध और गहराता है।