भारत सरकार और विभिन्न राज्य प्रशासनों ने एलपीजी (LPG) सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे अप्रत्यक्ष प्रभाव के बीच, देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की कृत्रिम कमी की खबरें सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्व और गैस एजेंसियां इस स्थिति का लाभ उठाकर सिलेंडरों का अवैध भंडारण कर रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं और लोगों से पैनिक बुकिंग न करने की अपील की गई है।
भोपाल में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: 2200 से अधिक सिलेंडर बरामद
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने जमाखोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, एक बंद पड़ी गैस एजेंसी के परिसर पर छापेमारी के दौरान कुल 2242 सिलेंडर बरामद किए गए हैं। इनमें से 668 सिलेंडर तीन ट्रकों में लदे हुए पाए गए, जबकि 1574 सिलेंडर गोदाम के भीतर बिना किसी वैध रिकॉर्ड के रखे गए थे। जांच में पाया गया कि यह एजेंसी बंद होने के बावजूद अवैध रूप से ऊंचे दामों पर सिलेंडरों की बिक्री कर रही थी और प्रशासन ने सभी सिलेंडरों को जब्त कर लिया है और संबंधित पक्षों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मुंबई में छापेमारी और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर प्रभाव
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी एलपीजी की कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय हैं। मुंबई के वर्ली इलाके में की गई छापेमारी के दौरान घरेलू और वाणिज्यिक दोनों श्रेणियों के सिलेंडर जब्त किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि रेड के दौरान 5 किलो वाले 6 भरे हुए और 58 खाली सिलेंडर बरामद हुए, जिन्हें अवैध रूप से रिफिल कर बेचा जा रहा था। इस संकट का सीधा असर मुंबई के होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर भी देखा जा रहा है। गैस की कमी और कालाबाजारी के कारण कई छोटे रेस्टोरेंट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है, जबकि कुछ प्रसिद्ध प्रतिष्ठान अब खाना पकाने के लिए पारंपरिक कोयले और लकड़ी के चूल्हों का उपयोग करने पर मजबूर हैं।
उत्तर प्रदेश में सख्त निगरानी और गोदामों की सीलिंग
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राज्य भर में जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मुरादाबाद में जिला पूर्ति अधिकारी ने एक गैस एजेंसी के गोदाम पर छापेमारी की, जहां बुकिंग और वितरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी के खिलाफ लगातार हेराफेरी की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। इसी तरह, नोएडा और गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में भी गैस वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गई हैं। प्रशासन ने वितरण प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है ताकि पात्र उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल सके।
छत्तीसगढ़ में व्यापक अभियान: 102 स्थानों पर छापेमारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने एलपीजी संकट से निपटने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 102 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान कुल 741 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। सबसे अधिक कार्रवाई रायपुर में हुई, जहां 392 सिलेंडरों को अवैध भंडारण के आरोप में जब्त किया गया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं और आपूर्ति में देरी का फायदा उठाने वाले बिचौलियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने गैस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होम डिलीवरी सेवा को प्राथमिकता दें ताकि गोदामों पर भीड़ कम हो सके।
आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और सरकारी दिशा-निर्देश
केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति में किसी भी प्रकार की स्थायी कमी नहीं है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि मध्य पूर्व के संकट के बावजूद आयात और घरेलू उत्पादन का संतुलन बनाए रखा जा रहा है। पैनिक बुकिंग के कारण वितरण नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को देरी का सामना करना पड़ रहा है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया है कि वे वितरण केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि एक ही पते पर बार-बार होने वाली बुकिंग की जांच की जाए। प्रशासन ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत वितरकों से ही सिलेंडर लें और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी की सूचना तुरंत स्थानीय अधिकारियों को दें।