भारत के कई महानगरों में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है और अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत के घरेलू और वाणिज्यिक गैस वितरण पर पड़ा है। मुंबई और नोएडा जैसे शहरों में स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है, जहां उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर रिफिल के लिए 2 से 8 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस संकट ने न केवल घरेलू रसोई को प्रभावित किया है, बल्कि वाणिज्यिक गतिविधियों को भी ठप कर दिया है।
मुंबई में गैस वितरण की वर्तमान स्थिति
मुंबई के विभिन्न उपनगरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। कांदिवली जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लोग सुबह 5:00 बजे से ही गैस एजेंसियों के बाहर खाली सिलेंडर लेकर कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। स्थानीय वितरकों के अनुसार, मुख्य डिपो से आपूर्ति में आई कमी के कारण रिफिलिंग प्रक्रिया धीमी हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी समितियां गठित की हैं ताकि वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। कई निवासियों ने बताया कि उन्हें गैस न मिलने के कारण बाहर से खाना मंगवाना पड़ रहा है, जो आर्थिक रूप से बोझिल साबित हो रहा है।
नोएडा के सेक्टर 5 में आपूर्ति का संकट
उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी स्थिति मुंबई से अलग नहीं है। विशेष रूप से सेक्टर 5 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले चार दिनों से गैस वितरण करने वाली गाड़ियां नहीं पहुंची हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे सुबह 3:00 बजे से ही सड़कों पर सिलेंडर लेकर बैठ जाते हैं, लेकिन शाम तक खाली हाथ लौटना पड़ता है। गैस की अनुपलब्धता के कारण कई श्रमिक और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार सत्तू और दही-चूड़ा जैसे बिना पकाए जाने वाले भोजन पर निर्भर हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पड़ोसियों से गैस उधार मांगकर किसी तरह एक समय का भोजन तैयार किया जा रहा है।
होटल और रेस्तरां उद्योग पर व्यापक प्रभाव
वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति लगभग ठप होने से खाद्य उद्योग पर गहरा संकट मंडरा रहा है। मुंबई में लगभग 20-40% छोटे होटल और रेस्तरां या तो पूरी तरह बंद हो गए हैं या उन्होंने अपने मेन्यू को सीमित कर दिया है। होटल मालिकों के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी सामने आ रही हैं। ईंधन की कमी के कारण तंदूर और भारी गैस खपत वाले व्यंजनों को बनाना बंद कर दिया गया है। इससे न केवल व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।
तकनीकी खामियां और फर्जी डिलीवरी संदेश
इस संकट के बीच उपभोक्ताओं को एक नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है और कई ग्राहकों ने शिकायत की है कि उनके मोबाइल पर सिलेंडर 'डिलीवर' होने के फर्जी मैसेज आ रहे हैं, जबकि वास्तव में उन्हें सिलेंडर प्राप्त नहीं हुआ है। नोएडा और मुंबई के कई उपभोक्ताओं ने बताया कि जब वे इन संदेशों के आधार पर एजेंसी पहुंचते हैं, तो उन्हें स्टॉक खत्म होने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है। यह तकनीकी गड़बड़ी है या वितरण प्रणाली में कोई बड़ी खामी, इसकी जांच की मांग की जा रही है।
स्थानीय प्रशासन और निगरानी समितियों की भूमिका
बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुंबई में आपूर्ति की निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं जो यह सुनिश्चित कर रही हैं कि उपलब्ध स्टॉक का वितरण 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर हो। नोएडा में भी पुलिस और प्रशासन की टीमें गैस वितरण केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता और शिपिंग मार्गों में व्यवधान के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसे सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।