मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधाओं की खबरों के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। इस स्थिति का अनुचित लाभ उठाते हुए कुछ सेवा प्रदाताओं और होटलों द्वारा उपभोक्ताओं से भोजन के बिल पर अतिरिक्त 'गैस चार्ज' या 'फ्यूल चार्ज' वसूलने के मामले सामने आए हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और इस प्रकार की अतिरिक्त वसूली पूरी तरह से अवैध है। सरकार ने उपभोक्ताओं को सचेत किया है कि वे किसी भी प्रकार के अनधिकृत शुल्क का भुगतान न करें और ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करें।
फूड बिल में अतिरिक्त शुल्क की अवैध वसूली
विभिन्न शहरों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, कुछ होटल और रेस्तरां अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल में 'एलपीजी सरचार्ज' या 'ईंधन शुल्क' के नाम पर अतिरिक्त राशि जोड़ रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मेनू कार्ड में दर्शाई गई कीमतों और लागू सरकारी करों (GST) के अलावा किसी भी अन्य नाम से पैसा वसूलना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि होटल संचालन में उपयोग होने वाली गैस की लागत पहले से ही खाद्य पदार्थों की कीमत में शामिल होती है, इसलिए अलग से शुल्क लेना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे बिल का भुगतान करने से पहले मदों की सावधानीपूर्वक जांच करें और किसी भी संदिग्ध शुल्क पर आपत्ति जताएं।
एलपीजी आपूर्ति पर सरकार का आधिकारिक रुख
केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारत के पास एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। मिडिल ईस्ट के संकट के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से कार्य कर रही है और सरकार के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में देखी गई लंबी लाइनें आपूर्ति की कमी के कारण नहीं, बल्कि घबराहट में की गई खरीदारी (Panic Buying) और बिचौलियों द्वारा फैलाई गई अफवाहों का परिणाम हैं। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अपनी आवश्यकता के अनुसार ही सिलेंडर बुक करें। आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए तेल विपणन कंपनियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे वितरण केंद्रों पर निगरानी बढ़ाएं।
हेल्पलाइन नंबर 1915 पर शिकायत की प्रक्रिया
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी साझा की है कि यदि कोई होटल या दुकानदार एलपीजी के नाम पर अधिक पैसे मांगता है, तो ग्राहक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) का उपयोग कर सकते हैं। उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज कराते समय उपभोक्ता के पास संबंधित प्रतिष्ठान का बिल और घटना का विवरण होना अनिवार्य है। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भेजा जाता है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता अपने मोबाइल से SMS के जरिए भी प्रारंभिक जानकारी साझा कर सकते हैं।
ई-जागृति और सीसीपीए के माध्यम से कानूनी विकल्प
डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देते हुए सरकार ने 'ई-जागृति' (जिसे पहले ई-दाखिल के नाम से जाना जाता था) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान की है। उपभोक्ता घर बैठे अपनी शिकायत उपभोक्ता आयोग में जमा कर सकते हैं। इसके अलावा, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को भी ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति प्राप्त है। यदि कोई प्रतिष्ठान सामूहिक रूप से उपभोक्ताओं को धोखा दे रहा है, तो सीसीपीए उस पर भारी जुर्माना लगा सकता है और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश कर सकता है। जिला स्तर पर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी जा सकती है, जो आवश्यक जांच के आदेश दे सकते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश
उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए विभाग ने कुछ बुनियादी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ग्राहकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे केवल वैध रसीद ही स्वीकार करें। यदि बिल में 'गैस चार्ज' जैसा कोई संदिग्ध कॉलम दिखता है, तो उसे तुरंत हटाने के लिए प्रबंधन से कहें। अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ताओं को डराने या आपूर्ति की कमी का हवाला देकर अधिक पैसे वसूलना एक दंडनीय अपराध है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगना भी नियमों के विरुद्ध है। किसी भी विवाद की स्थिति में, उपभोक्ता को साक्ष्य के रूप में बिल की फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग रखने का सुझाव दिया गया है ताकि कानूनी कार्यवाही में आसानी हो।