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मलेशिया: पीएम अनवर इब्राहिम ने लगाया तख्तापलट की साजिश का आरोप

मलेशिया: पीएम अनवर इब्राहिम ने लगाया तख्तापलट की साजिश का आरोप
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मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने देश की राजनीति में एक बड़े हस्तक्षेप का दावा करते हुए सनसनी फैला दी है और मंगलवार, 3 मार्च को मलेशियाई संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने और गिराने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है। अनवर इब्राहिम के अनुसार, इस साजिश में विदेशी समूह, एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान और देश के कुछ विपक्षी नेता शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इन प्रयासों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी और जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू की जाएगी।

संसद में प्रधानमंत्री का आधिकारिक संबोधन

प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने संसद में बोलते हुए कहा कि उनकी सरकार को गिराने के प्रयास सक्रिय रूप से किए जा रहे हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बयान दिया कि इस साजिश के पीछे एक यहूदी समूह और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का हाथ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस तरह की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने सदन को सूचित किया कि दोषियों की पहचान करने और उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। अनवर ने जोर देकर कहा कि मलेशिया की संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

विदेशी समूहों और मीडिया की भूमिका पर आरोप

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से एक यहूदी समूह और अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट 'ब्लूमबर्ग' का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समूह अंतरराष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से मलेशिया के बारे में नकारात्मक खबरें प्रसारित कर रहा है और अनवर इब्राहिम के अनुसार, इस दुष्प्रचार का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का ध्यान आकर्षित करना और मलेशिया की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि यह मीडिया अभियान उनकी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

गाजा और ईरान पर रुख का प्रभाव

अनवर इब्राहिम ने इस कथित साजिश को गाजा और ईरान के प्रति उनके कड़े रुख से जोड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीन और ईरान का समर्थन करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गाजा और ईरान के मानवीय मुद्दों पर बोलना अपराध है। गौरतलब है कि मलेशिया ने हाल ही में ईरान के प्रति अपना खुला समर्थन व्यक्त किया था और इस्माइल हानियेह की हत्या की कड़ी निंदा की थी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह इन दबावों के बावजूद अपने रुख पर कायम रहेंगे।

विपक्ष की भूमिका और राजनीतिक इतिहास

प्रधानमंत्री ने मलेशियाई विपक्ष की भी तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए विदेशी समूहों के साथ मिलकर काम कर रहा है। अनवर ने कहा कि मलेशिया की जनता ऐसे नेताओं को कभी माफ नहीं करेगी जो बाहरी ताकतों के साथ मिलकर अपनी ही सरकार को गिराने की कोशिश करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मलेशिया में 2020 और 2021 में भी राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने और सरकार गिराने की कोशिशें हुई थीं, जिन्हें 'शेरटन मूव' के नाम से जाना जाता है।

मलेशिया की जनसांख्यिकीय और कूटनीतिक स्थिति

मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का एक प्रमुख मुस्लिम बहुल देश है। 5% मुसलमान हैं। 1% हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि मलेशिया में यहूदी आबादी नगण्य होने के बावजूद प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर एक यहूदी समूह पर सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया है। मलेशिया ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीन के मुद्दे पर मुखर रहा है और इजरायल के साथ उसके कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।

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