कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर सरकार के प्रस्तावित परिसीमन के मुद्दे पर अपनी चिंताओं को साझा किया है। इस पत्र के माध्यम से खरगे ने परिसीमन के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपनी मांग को दोहराया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। खरगे का यह पत्र संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने संसद के एक और सत्र की संभावना के संकेत दिए थे।
परिसीमन और सीटों के आवंटन पर मुख्य मांगें
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि परिसीमन से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्होंने मांग की है कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि राज्यों को लोकसभा में जो वर्तमान सीट आवंटन प्राप्त है, उसे भी अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए। खरगे का मानना है कि इस तरह के बड़े बदलावों से पहले सभी पक्षों की सहमति और विस्तृत अध्ययन अनिवार्य है, ताकि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
महिला आरक्षण और विशेष सत्र की संभावना
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में महिला आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने मांग की है कि महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाना चाहिए। खरगे ने बताया कि वह इन मांगों को इसलिए दोहरा रहे हैं क्योंकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार रात एक टीवी इंटरव्यू में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना जताई थी। उन्होंने इस संभावना को मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने में हो रही देरी से भी जोड़कर देखा है और खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि किसी भी विशेष सत्र में प्रस्ताव पेश करने से पहले सभी दलों को उसे विस्तार से समझने का मौका मिले।
पुराने पत्रों और विधायी घटनाक्रमों का हवाला
खरगे ने अपने पत्र में याद दिलाया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इस बार 16 और 17 अप्रैल 2026 की तरह दोबारा "बुलडोजर" चलाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। खरगे ने उस घटना का जिक्र किया जब 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था। उस समय विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष में 230 वोट दर्ज किए गए थे।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: पहली, लोकसभा की 543 सीटों की संख्या 25 साल तक न बदली जाए; दूसरी, राज्यों का मौजूदा सीट आवंटन 25 साल तक स्थिर रहे; और तीसरी, 2029 से महिला आरक्षण लागू हो। खरगे ने अंत में कहा कि परिसीमन एक ऐसा विषय है जिसका व्यापक असर पूरे देश पर पड़ेगा, इसलिए इस मामले में सभी हितधारकों को पर्याप्त अवसर और समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का रुख इस पर पूरी तरह साफ है और वे चाहते हैं कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई कदम न उठाए।