पीओके चुनाव में मसूद अजहर का करीबी पीर मजहर मैदान में, नवाज शरीफ ने दिया टिकट

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पीओके चुनाव में मसूद अजहर का करीबी पीर मजहर मैदान में, नवाज शरीफ ने दिया टिकट
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई जब यह खबर सामने आई कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का बेहद करीबी माना जाने वाला पीर मजहर चुनावी मैदान में उतर गया है। पीर मजहर को किसी और ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने अपना उम्मीदवार बनाया है और इस कदम को पीओके की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जहाँ मुख्यधारा की पार्टियाँ अब कट्टरपंथी चेहरों के सहारे अपनी सत्ता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं। पीर मजहर का इतिहास और उसका आतंकी संगठनों से जुड़ाव इस चुनाव को और भी विवादास्पद बना रहा है।

नवाज शरीफ की पार्टी और पीर मजहर का गठबंधन

पीर मजहर को कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटों में से एक पर चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया गया है। नवाज शरीफ की पार्टी का यह फैसला पूरी तरह से रणनीतिक माना जा रहा है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य पीओके के उन इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना है जहाँ कट्टरपंथी विचारधारा का प्रभाव अधिक है। पीर मजहर के जरिए पीएमएल-एन उन मतदाताओं को अपने पाले में लाना चाहती है जो पारंपरिक राजनीति से हटकर कट्टरपंथी झुकाव रखते हैं। विशेष रूप से नीलम घाटी जैसे क्षेत्रों में पीर मजहर का काफी प्रभाव माना जाता है, जिसका लाभ नवाज शरीफ की पार्टी उठाना चाहती है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, इन 12 आरक्षित सीटों के लिए कुल 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहाँ मुख्य मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पीएमएल-एन के बीच है, क्योंकि इमरान खान की पार्टी पीटीआई और कई स्थानीय दलों ने इस चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार किया है।

कौन है पीर मजहर? आतंकी अतीत और राजनीतिक सफर

पीर मजहर का पूरा नाम पीर मजहर सईद शाह है, लेकिन पीओके की नीलम घाटी में उसे अब्दुल शाह मजहर के नाम से भी पहचाना जाता है और उसका अतीत काफी विवादों भरा रहा है। 1980 के दशक में जब अफगानिस्तान में रूस के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ था, तब पीर मजहर भी तालिबानियों के साथ इस लड़ाई में शामिल हो गया था। इसी दौरान उसने आतंक की ट्रेनिंग ली और युद्ध के गुर सीखे और अफगानिस्तान का संघर्ष खत्म होने के बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद का दामन थाम लिया। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, 2003 में पीर मजहर को जैश-ए-मोहम्मद की कराची यूनिट का प्रमुख बनाया गया था। उसे लंबे समय तक मसूद अजहर का दायां हाथ और सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता रहा है।

सत्ता का गणित और पीर मजहर की भूमिका

पीर मजहर ने 2021 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। उस समय उसने इमरान खान की पार्टी पीटीआई के समर्थन से चुनाव लड़ा और विधायक चुना गया और इमरान खान के कार्यकाल के दौरान उसे पीओके की सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं और पीर मजहर नवाज शरीफ की पार्टी में शामिल हो गया है। नवाज शरीफ को पीर मजहर की जरूरत इसलिए है क्योंकि पीओके में सरकार बनाने के लिए 27 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में नवाज शरीफ की पार्टी के पास 25 विधायक हैं और उसे बहुमत के लिए केवल 2 और सीटों की दरकार है। यदि पार्टी इन आरक्षित सीटों में से कम से कम 2 सीटें नहीं जीतती है, तो वह सत्ता से दूर रह सकती है। ऐसे में नीलम घाटी में मजबूत पकड़ रखने वाले पीर मजहर को साथ लेकर नवाज शरीफ की पार्टी पीओके की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही है।

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