भारतीय वायदा बाजार में शुक्रवार, 13 फरवरी को कीमती धातुओं की कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों के भाव में जबरदस्त रिकवरी देखी गई और पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी और वैश्विक संकेतों के चलते बाजार में यह उछाल आया है। 30% की बढ़त के साथ ₹1,54,837 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में और भी अधिक तीव्रता देखी गई, जहां मार्च वायदा चांदी ₹6,600 से अधिक की छलांग लगाकर ₹2,43,081 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती नजर आई।
MCX पर सोने और चांदी की वर्तमान स्थिति
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत से ही तेजी का रुख बना रहा और सोने का अप्रैल अनुबंध पिछले बंद भाव से काफी ऊपर खुला और देखते ही देखते ₹1,54,837 के स्तर को छू गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सत्र में आई गिरावट के बाद निचले स्तरों पर मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है। चांदी के मामले में तेजी और भी अधिक व्यापक रही। 4% की बढ़त के साथ ₹2,43,081 प्रति किलो पर पहुंच गया। पिछले सत्र में चांदी की कीमतों में लगभग 11% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई थी, जिसके बाद शुक्रवार को बाजार में शॉर्ट कवरिंग का दौर चला। इस रिकवरी ने घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों को फिर से ऊंचे स्तरों पर स्थापित कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं का रुझान
वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती का रुख देखा गया। 40 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। 76 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करती देखी गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच निवेशकों ने कीमती धातुओं को सुरक्षित विकल्प के रूप में प्राथमिकता दी है। पिछले सत्र में वैश्विक बाजारों में आई भारी बिकवाली के दौरान निवेशकों ने अन्य संपत्तियों में घाटे की भरपाई के लिए सोने और चांदी में मुनाफावसूली की थी, लेकिन अब बाजार में स्थिरता लौटने के साथ ही खरीदारी फिर से शुरू हो गई है।
अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का बाजार पर प्रभाव
अमेरिका से आए हालिया आर्थिक आंकड़ों ने भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में नॉनफार्म पेरोल में 1,30,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं। यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों के अनुरूप रहा है। 3% पर आ गई है। इन मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की समयसीमा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, अब बाजार को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व जुलाई के महीने में ब्याज दरों में कटौती का फैसला ले सकता है। रोजगार बाजार में मजबूती के चलते डॉलर इंडेक्स में भी हलचल देखी गई है, जिसका सीधा असर सोने की वैश्विक कीमतों पर पड़ता है।
शॉर्ट कवरिंग और बाजार की तरलता
बाजार के जानकारों के अनुसार, शुक्रवार को आई तेजी का एक मुख्य कारण 'शॉर्ट कवरिंग' भी है। पिछले सत्र में जब चांदी की कीमतों में 11% की भारी गिरावट आई थी, तब कई व्यापारियों ने बिकवाली के सौदे किए थे। कीमतों में स्थिरता आने के बाद उन सौदों को काटने के लिए की गई खरीदारी ने कीमतों को ऊपर धकेल दिया। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में तरलता की स्थिति और केंद्रीय बैंकों की गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। घरेलू बाजार में शादी-ब्याह के सीजन के चलते भौतिक मांग में भी निरंतरता बनी हुई है, जो कीमतों को निचले स्तरों पर गिरने से रोक रही है और एमसीएक्स पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी शुक्रवार को अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और मुद्रास्फीति
निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़ों पर टिकी हुई है। यदि महंगाई दर में गिरावट आती है, तो फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान हो जाएगा, जो सोने के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। वर्तमान में, उच्च ब्याज दरों के बावजूद सोने की कीमतों में मजबूती बनी हुई है क्योंकि इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ एक बचाव के रूप में देखा जाता है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीदारी भी कीमतों को समर्थन प्रदान कर रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों की टिप्पणियां भी बाजार की चाल निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगी।