मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की दिग्गज नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया गया। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा लिए गए इस फैसले ने कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका दिया है। यह विवाद मुख्य रूप से एक लंबित न्यायिक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में न देने या उसे छिपाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गरमा गया है।
विवाद का मुख्य कारण और तेलंगाना का मामला
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन के रद्द होने के पीछे की जड़ें साल 2022 के एक पुराने मामले से जुड़ी हुई हैं जो तेलंगाना राज्य से संबंधित है। इस मामले में एक महिला ने कांग्रेस के एक अन्य नेता के. शिवा कुमार रेड्डी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का आरोप था कि के. शिवा कुमार रेड्डी ने उसके साथ छेड़छाड़ की, उसका यौन उत्पीड़न किया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस पूरे प्रकरण में मीनाक्षी नटराजन का नाम तब सामने आया जब पीड़ित महिला ने दावा किया कि उसने इस गंभीर विषय की शिकायत कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से की थी।
पीड़ित महिला का आरोप है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद पार्टी स्तर पर आरोपी नेता के खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। महिला के अनुसार, उसकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण उसे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बाद में जब यह मामला अदालत में पहुंचा, तो वहां दायर की गई याचिका में मीनाक्षी नटराजन के नाम का भी उल्लेख किया गया था और याचिका में यह बताया गया था कि प्रभारी होने के नाते उन्हें मामले की जानकारी दी गई थी लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच कानूनी तर्क
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने इस कानूनी बिंदु को प्रमुखता से उठाया। बीजेपी के प्रतिनिधियों ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष यह तर्क दिया कि चूंकि अदालत में एक याचिका लंबित है जिसमें मीनाक्षी नटराजन का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है, इसलिए यह एक लंबित न्यायिक मामला माना जाना चाहिए। बीजेपी का कहना था कि चुनाव नियमों के अनुसार, उम्मीदवार को अपने हलफनामे में ऐसे सभी कानूनी मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है और बीजेपी ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन ने जानबूझकर इस जानकारी को छिपाया है, जो कि नामांकन रद्द करने का एक ठोस आधार है।
कांग्रेस का बचाव और रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने अपनी उम्मीदवार का पुरजोर बचाव किया और कांग्रेस की कानूनी टीम ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी भी पुलिस स्टेशन में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला चल रहा है। कांग्रेस का तर्क था कि किसी तीसरे पक्ष द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका में केवल नाम होने का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही लंबित है। कांग्रेस के अनुसार, जब तक कोई औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज न हो, तब तक ऐसी जानकारी देना अनिवार्य नहीं होता है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव के कारण उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया और उनकी शिकायतों को लगातार अनसुना किया गया और रिटर्निंग ऑफिसर के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या लंबित याचिका में नाम होने की स्थिति में उसका खुलासा नामांकन पत्र में करना जरूरी था। अंततः, रिटर्निंग ऑफिसर ने माना कि आवश्यक जानकारी न देने के कारण नामांकन पत्र में त्रुटि है और इसी आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस इस फैसले से काफी भड़की हुई है।