मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग तेज, राजस्थान में शिक्षकों का बड़ा आंदोलन और जयपुर में महापड़ाव

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मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग तेज, राजस्थान में शिक्षकों का बड़ा आंदोलन और जयपुर में महापड़ाव
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजस्थान की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे और उन्हें मंत्रिमंडल से तुरंत बर्खास्त करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है और राजस्थान के शिक्षा विभाग में व्याप्त विभिन्न समस्याओं और मंत्री के कुछ विवादास्पद फैसलों को लेकर शिक्षक और कर्मचारी अब सड़कों पर उतर आए हैं। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के बैनर तले राज्य कर्मचारियों का एक बड़ा गुट पूरी तरह से लामबंद हो गया है और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना चुका है।

जयपुर में कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन

आज 26 जुलाई को जयपुर में राजस्थान के कोने-कोने से आए हजारों कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह भारी आक्रोश शिक्षा विभाग में लंबे समय से जारी प्रशासनिक अनिश्चितता, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक, स्थानांतरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पदोन्नत अधिकारियों की पोस्टिंग में हो रही देरी और शिक्षकों के प्रति मंत्री के व्यवहार को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में संवाद की कमी और तानाशाही रवैये के कारण शैक्षणिक माहौल खराब हो रहा है, जिसके लिए सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं।

थर्ड ग्रेड शिक्षकों की अनदेखी और ट्रांसफर नीति का विवाद

राजस्थान में शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा और पुराना विवाद शिक्षकों के तबादलों को लेकर चल रहा है और इस मुद्दे से राज्य के 5 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। तृतीय श्रेणी (Grade III) के शिक्षक पिछले कई सालों से एक पारदर्शी तबादला नीति (Transfer Policy) के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। स्थानांतरण न होने के कारण हजारों शिक्षक अपने परिवारों से दूर हैं, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महासंघ का आरोप है कि विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान मानवीय नियमों की पूरी तरह अनदेखी की है। कैंसर और अन्य असाध्य रोगों से ग्रस्त शिक्षकों, विधवाओं, परित्यक्ता महिलाओं और पति-पत्नी को एक ही स्थान पर नियुक्त करने वाले स्पॉउज केस के नियमों को भी ताक पर रख दिया गया है।

निजता का हनन और महिला शिक्षकों का विरोध

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कुछ मौखिक दिशा-निर्देशों ने इस विवाद को और अधिक हवा दी है। स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान महिला शिक्षिकाओं के निजी मोबाइल फोन चेक किए जाने की खबरों ने शिक्षकों में भारी रोष पैदा कर दिया है। महासंघ ने इस पर सख्त आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे निजता का हनन बताया है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी प्रशासनिक निरीक्षण के नाम पर महिला कर्मचारियों के व्यक्तिगत फोन की जांच करना उनकी गरिमा और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस प्रकार के व्यवहार से महिला शिक्षकों में असुरक्षा और अपमान की भावना घर कर गई है।

प्रशासनिक विफलता और दिव्यांगों का उत्पीड़न

विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए महासंघ ने बताया कि पदोन्नति पा चुके सैकड़ों प्रिंसिपलों और वाइस-प्रिंसिपलों को पिछले 1 साल और 6 महीने से नई पोस्टिंग नहीं दी गई है। इसके कारण प्रदेश के सैकड़ों उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली पड़े हैं, जिससे न केवल प्रशासनिक कार्य बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, शारीरिक प्रशिक्षण शिक्षकों (PTI) के नियमितीकरण की प्रक्रिया में भी बेवजह देरी की जा रही है। महासंघ ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि दिव्यांग श्रेणी के कर्मचारियों को उनके मेडिकल सर्टिफिकेट्स की बार-बार जांच करवाकर प्रशासनिक स्तर पर प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा है।

मदन दिलावर की चुनौती और आंदोलन की चेतावनी

चौतरफा हमलों और इस्तीफे की मांग के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक बड़ी चुनौती दी है। मदन दिलावर ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने बच्चों की कसम खाकर यह साबित कर दे कि उन्होंने किसी भी शिक्षक के तबादले के बदले 1 रुपया भी लिया है, तो वे उसी समय राजनीति से संन्यास ले लेंगे। हालांकि, कर्मचारी महासंघ इस बयान से संतुष्ट नहीं है और जयपुर के बाइस गोदाम सर्किल पर महापड़ाव डाल चुके हजारों कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन सौंपकर मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे राजस्थान के स्कूलों में तालाबंदी और कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

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