डिजिटल सट्टेबाजी और वित्तीय तकनीक की दुनिया में एक नया और बेहद विवादित मोड़ आया है जिसे मेंशन मार्केट कहा जा रहा है और प्रेडिक्शन मार्केट का यह नया रूप हाल के दिनों में अमेरिका में नियामकों की कड़ी निगरानी के दायरे में आ गया है। आमतौर पर प्रेडिक्शन मार्केट में लोग चुनाव के नतीजों, खेल के परिणामों या आर्थिक आंकड़ों पर दांव लगाते हैं, लेकिन मेंशन मार्केट में मामला थोड़ा अलग और पेचीदा है और यहां लोग इस बात पर पैसा लगाते हैं कि कोई सार्वजनिक हस्ती अपने भाषण या बातचीत में किन विशिष्ट शब्दों का इस्तेमाल करेगी। अमेरिका में इन बाजारों को लेकर शुरू हुई जांच का मुख्य कारण यह है कि इन्हें बहुत आसानी से प्रभावित और हेरफेर किया जा सकता है।
क्या है मेंशन मार्केट और यह कैसे काम करता है?
मेंशन मार्केट का सीधा अर्थ किसी शब्द, नाम या वाक्यांश के उल्लेख से जुड़ा है। इस बाजार में एक विशिष्ट प्रश्न रखा जाता है और लोग उसके संभावित उत्तर पर अपना पैसा लगाते हैं। उदाहरण के तौर पर, बाजार में यह सवाल हो सकता है कि क्या राष्ट्रपति अपने अगले राष्ट्र के नाम संबोधन में टैरिफ शब्द का प्रयोग करेंगे? या क्या किसी बड़ी कंपनी के सीईओ अपनी आय घोषणा कॉल के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई शब्द का उल्लेख करेंगे? इसी तरह, खेल के मैदान में कमेंटेटर द्वारा किसी खास खिलाड़ी के लिए एमवीपी शब्द बोलने या किसी टीवी इंटरव्यू में किसी खास नेता का नाम लिए जाने पर भी दांव लगाया जाता है।
इस बाजार में आमतौर पर दो ही विकल्प होते हैं- हां और नहीं। यदि निर्धारित समय के भीतर वह शब्द बोल दिया जाता है, तो हां चुनने वाले लोग जीत जाते हैं और उन्हें भुगतान मिलता है। यदि वह शब्द नहीं बोला जाता, तो नहीं चुनने वाले लोग विजेता बनते हैं। यह मॉडल देखने में जितना सरल और मनोरंजक लगता है, इसके पीछे उतना ही बड़ा जोखिम छिपा है। चूंकि परिणाम पूरी तरह से एक व्यक्ति की भाषा पर निर्भर करता है, इसलिए उस व्यक्ति के पास नतीजे को बदलने की पूरी शक्ति होती है।
सामान्य प्रेडिक्शन मार्केट से भिन्नता
सामान्य प्रेडिक्शन मार्केट अक्सर बाहरी घटनाओं पर आधारित होते हैं जिन पर किसी एक व्यक्ति का पूर्ण नियंत्रण नहीं होता। जैसे चुनाव कौन जीतेगा या ब्याज दरें बढ़ेंगी या नहीं, यह लाखों लोगों की पसंद और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करता है और इसके विपरीत, मेंशन मार्केट का परिणाम अक्सर एक ही व्यक्ति की जुबान पर निर्भर करता है। वह व्यक्ति अपना भाषण अंतिम समय में बदल सकता है, किसी शब्द को जानबूझकर जोड़ सकता है या हटा सकता है। इतना ही नहीं, उस व्यक्ति के सहायक, भाषण लेखक, निर्माता या टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर को भी इस बात की पहले से जानकारी हो सकती है कि क्या बोला जाने वाला है। यही कारण है कि इन बाजारों को सामान्य भविष्यवाणी बाजारों की तुलना में अधिक संवेदनशील और जोखिम भरा माना जा रहा है।
लोकप्रियता के पीछे के कारण
मेंशन मार्केट की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह है कि इसमें लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ पैसे कमाने की संभावना दिखती है। लाइव भाषण, खेल प्रसारण और कॉरपोरेट कॉल पहले से ही भारी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। इन कार्यक्रमों के साथ सट्टेबाजी का विकल्प जुड़ने से लोगों की रुचि और बढ़ जाती है। प्लेटफॉर्म्स के लिए भी यह एक नया और आकर्षक व्यवसाय है क्योंकि इससे वे उन लोगों को भी जोड़ सकते हैं जो पारंपरिक खेल सट्टेबाजी में रुचि नहीं रखते। इस बाजार के समर्थकों का तर्क है कि बड़े नेताओं और उद्योगपतियों के शब्दों का सीधा असर शेयर बाजार और क्रिप्टो बाजार पर पड़ता है, इसलिए उन शब्दों का अनुमान लगाना एक तरह का वित्तीय विश्लेषण है।
अमेरिका में जांच की मुख्य वजह
अमेरिका की कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन यानी सीएफटीसी प्रेडिक्शन मार्केट से जुड़े वित्तीय अनुबंधों की निगरानी करती है और रिपोर्ट्स के अनुसार, एजेंसी अब यह देख रही है कि मेंशन मार्केट में हेरफेर का खतरा कितना वास्तविक है। नियामकों की सबसे बड़ी चिंता अंदरूनी जानकारी यानी इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर है। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को पहले से पता है कि किसी बड़े नेता के भाषण में कौन से शब्द शामिल होंगे। वह व्यक्ति भारी दांव लगाकर अनुचित लाभ कमा सकता है। यह व्यक्ति कोई भाषण लेखक, तकनीकी कर्मचारी या टीवी प्रोड्यूसर भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक आम उपयोगकर्ता, जो केवल अनुमान लगा रहा है, उसके पास जीतने का बराबर मौका नहीं होता।
टेलीप्रॉम्प्टर से जुड़ा बड़ा विवाद
इस पूरे मामले में एक बेहद चर्चित घटना ने अमेरिकी अधिकारियों की चिंता को चरम पर पहुंचा दिया। कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए लंबे समय तक टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर के रूप में काम करने वाले एक व्यक्ति ने भाषणों में आने वाले शब्दों से जुड़े दांव लगाए और उनसे लाभ कमाया। अधिकारियों ने बताया कि उनके निगरानी तंत्र ने संदिग्ध समय पर लगाए गए दांवों की पहचान की और मामले को संघीय जांच एजेंसियों तक पहुंचाया। हालांकि यह मामला अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है, लेकिन इसने मेंशन मार्केट की सुरक्षा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हेरफेर के विभिन्न तरीके
मेंशन मार्केट में हेरफेर करना काफी आसान हो सकता है। वक्ता खुद अपने शब्दों को बदल सकता है या उसका कोई करीबी उसे खास शब्द बोलने के लिए प्रेरित कर सकता है। यदि कोई इंटरव्यू पहले से रिकॉर्ड किया गया है, तो वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति को परिणाम सार्वजनिक होने से पहले ही पता चल जाएगा। इसी तरह, किसी कंपनी की आय घोषणा की स्क्रिप्ट कई कर्मचारियों के पास होती है। कई बार हेरफेर जानबूझकर नहीं भी होता, जैसे किसी सीईओ की जुबान फिसल जाना या किसी कमेंटेटर का एक ही शब्द बार-बार दोहराना, लेकिन इससे दांव का नतीजा पूरी तरह बदल जाता है। कॉइनबेस के सीईओ ब्रायन आर्मस्ट्रांग ने एक बार जानबूझकर कुछ क्रिप्टो शब्द बोलकर यह दिखाया था कि इन बाजारों को कितनी आसानी से प्रभावित किया जा सकता है।
गलत रिपोर्टिंग और निपटारे का जोखिम
सिर्फ अंदरूनी जानकारी ही एकमात्र जोखिम नहीं है, बल्कि गलत रिपोर्टिंग भी बड़ा नुकसान करा सकती है और एक उदाहरण के तौर पर, विश्व कप फाइनल के दौरान एक कमेंटेटर ने कथित तौर पर अभिनेता मैट डेमन को ब्रैड पिट समझ लिया था। इसके बाद कुछ समाचार स्रोतों में भी गलत जानकारी प्रसारित हो गई। मेंशन मार्केट का निपटारा अक्सर पहले से तय नियमों और समाचार स्रोतों के आधार पर होता है। यदि स्रोत ही गलत जानकारी दे दे, तो सही अनुमान लगाने वाला व्यक्ति भी अपना पैसा हार सकता है। इसलिए अनुबंध की भाषा और निपटारे के नियमों का स्पष्ट होना अत्यंत आवश्यक है।
जांच के घेरे में आए प्रमुख प्लेटफॉर्म्स
इस विवाद के केंद्र में कल्शी और पॉलीमार्केट जैसे बड़े नाम हैं। कल्शी अमेरिका में प्रेडिक्शन मार्केट की एक प्रमुख कंपनी है। जांच की खबरें आने के बाद कल्शी ने खेलों से जुड़े कई मेंशन मार्केट्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। इनमें विशेष रूप से कमेंटेटरों द्वारा बोले जाने वाले शब्दों पर आधारित अनुबंध शामिल थे। हालांकि, राजनीति और कॉरपोरेट आय से जुड़े कुछ अन्य बाजार अभी भी अलग-अलग स्थितियों में उपलब्ध हैं और दूसरी ओर, पॉलीमार्केट की अंतरराष्ट्रीय सेवा पर भी इस तरह के मेंशन मार्केट उपलब्ध रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निगरानी का असर पूरे उद्योग पर पड़ना तय है।
अमेरिकी राज्यों में कानूनी चुनौतियां
संघीय जांच के अलावा, कई अमेरिकी राज्यों में भी प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर कानूनी खींचतान चल रही है। वाशिंगटन, मिशिगन, नेवादा और मैसाचुसेट्स जैसे राज्यों में कल्शी के कुछ बाजारों को लेकर रोक या कानूनी चुनौतियों की खबरें आई हैं। कुछ राज्य इन प्लेटफॉर्म्स को सट्टेबाजी का अड्डा मानते हैं, जबकि कंपनियां खुद को संघीय वित्तीय नियमों के तहत आने वाला पारदर्शी बाजार बताती हैं। यह बहस अब केवल मेंशन मार्केट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें राज्य के कानूनों और संघीय नियामक अधिकारों का बड़ा मुद्दा भी शामिल हो गया है।
प्लेटफॉर्म्स और आलोचकों के तर्क
प्लेटफॉर्म कंपनियों का कहना है कि वे कोई अवैध सट्टेबाजी नहीं करा रहे, बल्कि एक पारदर्शी और निगरानी वाला बाजार दे रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रभावशाली लोगों के शब्द पहले से ही वैश्विक बाजारों को प्रभावित करते हैं, इसलिए उन पर आधारित अनुमान लगाना गलत नहीं है। उनके पास हर लेनदेन का रिकॉर्ड होता है जिससे संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ा जा सकता है और इसके विपरीत, आलोचकों का कहना है कि यह निवेश नहीं बल्कि एक तरह का जुआ है। इससे वक्ताओं पर दबाव डालने या निजी जानकारी खरीदने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। साथ ही, आम उपयोगकर्ता को कभी पता नहीं चल पाता कि उसके सामने वाला खिलाड़ी अंदरूनी जानकारी रखता है या नहीं।
भविष्य की राह
आने वाले समय में नियामक एजेंसियां यह तय कर सकती हैं कि मेंशन मार्केट को किस हद तक अनुमति दी जानी चाहिए। जांच के बाद नए और कड़े नियम बन सकते हैं, कुछ श्रेणियों पर प्रतिबंध लग सकता है या निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा सकता है। मेंशन मार्केट तकनीक, मीडिया और सट्टेबाजी का एक ऐसा मिश्रण है जो जितना रोचक है, उतना ही विवादास्पद भी और जब तक इसमें निष्पक्षता और पारदर्शिता के सवालों का ठोस जवाब नहीं मिलता, तब तक इस पर विवाद बना रहेगा। अमेरिका की यह जांच पूरे प्रेडिक्शन मार्केट उद्योग के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।