अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया नक्शा साझा किया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस नक्शे के माध्यम से ट्रंप ने दावा किया है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई और फुजैराह जैसे महत्वपूर्ण शहर अब अमेरिका के इलाके हैं। इसके अलावा उन्होंने ईरान के केशम द्वीप और ओमान के भी कुछ हिस्सों को वाशिंगटन का क्षेत्र घोषित कर दिया है। ट्रंप का यह कदम मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यूएई और ओमान के इलाकों पर अमेरिकी दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के कुछ विशिष्ट इलाकों को गोला बनाकर साझा किया है। ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि ये इलाके अब अमेरिका के नियंत्रण में होंगे और इन्हें अमेरिकी क्षेत्र कहा जाएगा। इस नक्शे में यूएई की राजधानी दुबई को अमेरिका का इलाका बताया गया है और इसी तरह फुजैराह को भी वाशिंगटन के अधीन दिखाया गया है। यह दावा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यूएई और ओमान लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे हैं। हाल के समय में ईरान के साथ जारी विवाद के दौरान तेहरान ने यूएई पर कई हमले किए हैं, जिसके बीच ट्रंप ने अब इन क्षेत्रों पर अपना अधिकार जताया है।
ईरान का केशम द्वीप और होर्मुज पर नियंत्रण
ट्रंप द्वारा साझा किए गए नक्शे में केवल सहयोगियों की जमीन ही नहीं, बल्कि दुश्मन देश ईरान के हिस्सों को भी शामिल किया गया है। ट्रंप ने ईरान के केशम द्वीप और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों पर अपना दावा पेश किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से किए गए इस दावे ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने यह नक्शा ऐसे समय में साझा किया है जब उन्होंने ईरान के साथ चल रहे बवाल के बीच ओमान पर भी हमले की धमकी दी है। राष्ट्रपति का मानना है कि इन क्षेत्रों पर अमेरिका का नियंत्रण होने से सामरिक रूप से वाशिंगटन की स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी।
ईरान समझौते की 60 दिन की समयसीमा और आईआरजीसी
ईरान परमाणु समझौते को लेकर दी गई 60 दिन की डेडलाइन अब समाप्त हो चुकी है। इस समयसीमा के खत्म होने के बावजूद तेहरान ने अब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए नहीं खोला है। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए ट्रंप प्रशासन अब अपनी आखिरी कोशिशें कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के साथ समझौता करने के लिए सीधे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) के अधिकारियों से संपर्क साधा है। यह संपर्क इराक के नए प्रधानमंत्री के माध्यम से किया गया है, जो दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
मिडटर्म इलेक्शन और ट्रंप की रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप की इस पूरी कवायद के पीछे अमेरिका के आगामी मिडटर्म इलेक्शन को एक बड़ी वजह माना जा रहा है और ट्रंप प्रशासन की कोशिश है कि चुनावों से पहले किसी भी तरह से ईरान के साथ एक सम्मानजनक और लाभप्रद समझौता कर लिया जाए। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक तरफ जहां कूटनीतिक रास्ते अपनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नक्शा साझा कर क्षेत्रीय संप्रभुता पर दावा ठोककर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है। ट्रंप का यह दावा कि ये इलाके अब अमेरिका के हैं, सीधे तौर पर खाड़ी देशों की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को बदलने वाला साबित हो सकता है।