भारत से पंगा पड़ेगा भारी! ट्रॉफी विवाद के बाद ACC से होगी मोहसिन नकवी की छुट्टी?

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
भारत से पंगा पड़ेगा भारी! ट्रॉफी विवाद के बाद ACC से होगी मोहसिन नकवी की छुट्टी?
विज्ञापन

एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के भीतर इन दिनों भारी उथल-पुथल का माहौल है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एसीसी अध्यक्षता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एशिया कप के दौरान हुए ट्रॉफी विवादों ने इस स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। ताजा घटनाक्रमों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि मोहसिन नकवी को एसीसी अध्यक्ष के रूप में अगला कार्यकाल मिलना लगभग असंभव है और उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है। भारतीय टीमों के साथ उनके व्यवहार और राजनीतिक बयानों ने उनके प्रशासनिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

एशिया कप में ट्रॉफी को लेकर बढ़ा विवाद

एशिया कप के मंच पर पिछले कुछ समय से एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिल रही है। पिछले साल जब भारतीय पुरुष टीम ने एशिया कप का खिताब जीता था, तब टीम ने एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से परहेज किया था। यह विवाद यहीं नहीं थमा, बल्कि महिला एशिया कप में भी इसी तरह का नजारा देखने को मिला। भारतीय महिला टीम ने भी मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने में वैसी ही बेरुखी दिखाई और दरअसल, मोहसिन नकवी की यह जिद कि विजेता भारतीय टीमों को ट्रॉफी केवल उनके हाथों ही सौंपी जाए, अब उन पर ही भारी पड़ती दिख रही है। दो साल से चली आ रही इस खींचतान ने एसीसी के भीतर उनके प्रभाव को कम कर दिया है।

कार्यकाल और एक्सटेंशन की चुनौतियां

मोहसिन नकवी का एसीसी अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल अब अपने अंतिम चरण की ओर है और उनका दो साल का अनुबंध अप्रैल 2027 में समाप्त होने वाला है। हालांकि एसीसी के नियमों के तहत अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने का प्रावधान है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें सदस्य देशों का समर्थन मिलना मुश्किल है। किसी भी अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ाने के लिए एजीएम (सालाना आम बैठक) में एक औपचारिक प्रस्ताव की आवश्यकता होती है, जिसे अन्य सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए। भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा कड़वाहट को देखते हुए यह स्पष्ट है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) नकवी के नाम का समर्थन कभी नहीं करेगा।

एसीसी की रोटेशन पॉलिसी और नियम

एशियन क्रिकेट काउंसिल की अध्यक्षता एक रोटेशन पॉलिसी के तहत चलती है। इसके तहत एसीसी के 5 पूर्ण सदस्य देशों के बीच अध्यक्ष पद का रोटेशन होता है। इन देशों में भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं। प्रत्येक देश को दो साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्षता मिलती है। एजीएम में लिए गए फैसलों के आधार पर ही यह तय होता है कि अगला अध्यक्ष कौन होगा। नियम के मुताबिक, कोई भी देश अपने आप लगातार दो बार इस पद पर नहीं रह सकता। कार्यकाल को केवल विशेष परिस्थितियों में ही 1 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है, बशर्ते सभी सदस्य इसके लिए सहमत हों।

जय शाह और शम्मी सिल्वा का कार्यकाल

एसीसी के नेतृत्व के इतिहास पर नजर डालें तो भारत के जय शाह ने 30 जनवरी 2021 से 6 दिसंबर 2024 तक लगभग चार साल तक एसीसी प्रमुख के रूप में कार्य किया। उनके इस कार्यकाल में दो साल का मूल कार्यकाल और दो बार एक-एक साल का एक्सटेंशन शामिल था। जय शाह के बाद श्रीलंका के शम्मी सिल्वा ने अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में मोहसिन नकवी को दो साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था। जय शाह के कार्यकाल के दौरान मिली सर्वसम्मति के विपरीत, नकवी का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है।

विवादास्पद बयान और भारतीय रुख

मोहसिन नकवी की मुश्किलों का एक बड़ा कारण उनके राजनीतिक बयान भी हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के खिलाफ दिए गए उनके आपत्तिजनक और भड़काऊ बयानों ने भारतीय क्रिकेट जगत और प्रशंसकों में भारी नाराजगी पैदा की है। इन बयानों के कारण बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाया है। खेल और राजनीति के इस घालमेल ने नकवी की स्थिति को कमजोर कर दिया है। भारतीय टीमों द्वारा उनके हाथों ट्रॉफी न लेने का फैसला इसी नाराजगी का एक हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि अप्रैल 2027 के बाद मोहसिन नकवी की एसीसी से विदाई निश्चित है।

विज्ञापन