मुज्तबा खामेनेई की आर्थिक रणनीति: डॉलर का दबदबा खत्म करने के लिए ईरान का नया प्लान

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मुज्तबा खामेनेई की आर्थिक रणनीति: डॉलर का दबदबा खत्म करने के लिए ईरान का नया प्लान
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने देश की आर्थिक रणनीति को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान को अपनी चीजों का निर्माण स्वयं करके खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहिए और इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर देश की निर्भरता को कम करना है, ताकि वाशिंगटन द्वारा डाले जाने वाले किसी भी प्रकार के दबाव से बचा जा सके। खामेनेई के अनुसार, आर्थिक मजबूती अब केवल एक विकल्प नहीं रह गई है, बल्कि यह बाहरी वित्तीय दबावों का सामना करने और दीर्घकालिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए एक अनिवार्य राष्ट्रीय ढांचा बन गई है और उन्होंने सेवा-भाव वाले प्रशासन की जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही भविष्य का एकमात्र रास्ता है।

प्रतिरोध अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता पर जोर

मुज्तबा खामेनेई ने आत्मनिर्भर प्रतिरोध अर्थव्यवस्था यानी रेसिस्टेंस इकोनॉमी के निर्माण पर विशेष बल दिया है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश के महत्वपूर्ण लेन-देन में अमेरिकी डॉलर की भूमिका को धीरे-धीरे समाप्त करना आवश्यक है। उनके अनुसार, जब तक ईरान विदेशी मुद्राओं और विशेष रूप से डॉलर पर निर्भर रहेगा, तब तक वह बाहरी शक्तियों के आर्थिक हमलों के प्रति संवेदनशील बना रहेगा। इसलिए, घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और अपनी आर्थिक नीतियों को स्वदेशी संसाधनों के इर्द-गिर्द केंद्रित करना ही एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है और उत्पादन को हर स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

डॉलर की भूमिका को खत्म करने का लक्ष्य

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने अपने संदेश को और स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा कि आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है और उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धीरे-धीरे अमेरिकी डॉलर की अहम भूमिका को खत्म करना होगा और आखिरकार रेसिस्टेंस इकोनॉमी को देश का मुख्य आर्थिक केंद्र बनाना होगा। खामेनेई का मानना है कि ईरान की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों का वास्तविक हल केवल घरेलू उत्पादन में ही छिपा है। जब देश अपनी जरूरतों के लिए खुद पर निर्भर होगा, तो विदेशी प्रतिबंधों का असर अपने आप कम हो जाएगा।

घरेलू उत्पादन: समस्याओं का एकमात्र समाधान

सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी ने उनके संदेश को साझा करते हुए बताया कि इस क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान ज्यादा से ज्यादा घरेलू उत्पादन पर निर्भर रहने में है। खामेनेई ने सलाह दी कि जहां घरेलू उत्पादन कम हो, वहां आयात को बहुत ही सही और समझदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने अनावश्यक आयात पर रोक लगाने और देश के भीतर ही विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करने की बात कही और उनके अनुसार, घरेलू उत्पादन न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि यह विदेशी मुद्रा की बचत करने में भी सहायक सिद्ध होगा।

महंगाई और बेरोजगारी पर प्रहार

खामेनेई ने देश के सामने मौजूद प्रमुख आर्थिक समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोजगारी और कीमतों के प्रबंधन पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि निवेश को बढ़ाने की जरूरत है और इस निवेश को उन क्षेत्रों में लगाया जाना चाहिए जो देश के लिए उपयोगी और जरूरी हैं। प्रेस टीवी के अनुसार, आर्थिक और आजीविका संबंधी चुनौतियों पर गंभीर ध्यान देना होगा। इनमें महंगाई का नियंत्रण, बेरोजगारी को कम करना और बाजार में कीमतों का सही मैनेजमेंट शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास, निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देना ही प्रतिरोध अर्थव्यवस्था की नीतियों का मूल आधार है।

अमेरिका और इजराइल पर तीखा हमला

विरोधी देशों की नीतियों की आलोचना करते हुए खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल द्वारा बनाए जा रहे दबाव का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश यह भ्रम फैलाना चाहते हैं कि उनकी अनुचित मांगों को मानना ही आर्थिक प्रगति का एकमात्र रास्ता है। खामेनेई ने कहा कि देश का कट्टर दुश्मन यह जताना चाहता है कि प्रगति उनकी शर्तों पर चलने से ही संभव है। हालांकि, उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति से पहले भी इन शक्तियों ने देश और इसके संसाधनों के साथ जो किया, वह उनके दावों के ठीक उलट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता के साथ समझौता किए बिना अपनी आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करेगा।

ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का संदर्भ

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब वाशिंगटन की तरफ से ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट की घोषणा की गई है। ईरान इसे अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की एक साजिश के रूप में देखता है। खामेनेई ने अपने संबोधन में यह साफ कर दिया कि ईरान इन दबावों के आगे झुकने वाला नहीं है। इसके बजाय, देश अपनी आंतरिक शक्ति को मजबूत करेगा और एक ऐसी अर्थव्यवस्था का निर्माण करेगा जो बाहरी हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त हो। उन्होंने अंत में दोहराया कि प्रतिरोध अर्थव्यवस्था ही वह ढाल है जो ईरान को भविष्य के आर्थिक संकटों से बचाएगी।

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