ट्रंप प्रशासन ने एक विवादास्पद कदम उठाते हुए उन अफगान नागरिकों के रिश्तेदारों को मध्य अफ्रीकी गणराज्य (सीएआर) निर्वासित कर दिया है, जिन्होंने अमेरिकी सेना की महत्वपूर्ण मदद की थी। इस निर्वासन प्रक्रिया में कानूनी खामियों और तीसरे देश के समझौतों का सहारा लिया गया है। शनिवार को मध्य अफ्रीकी गणराज्य की राजधानी बांगुई पहुंची इस निर्वासन उड़ान में कई देशों के नागरिक शामिल थे, जिन्हें उनके मूल देश के बजाय एक अनजान देश में भेज दिया गया है।
निर्वासित लोगों का विवरण और आंकड़े
मानवाधिकार संगठनों और आव्रजन वकीलों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस निर्वासन में कुल 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिक शामिल थे। इनके अलावा, नेपाल और निकारागुआ के नागरिकों को भी इस उड़ान के जरिए मध्य अफ्रीकी गणराज्य भेजा गया है और इन प्रवासियों में एक 20 साल का अफगान युवक भी शामिल है, जिसके परिवार का अमेरिकी सेना के साथ गहरा संबंध रहा है। इस युवक ने तालिबान से अपनी जान को खतरा बताते हुए अमेरिका में शरण मांगी थी।
20 वर्षीय अफगान युवक की व्यथा
इस 20 वर्षीय अफगान नागरिक का मामला विशेष रूप से चर्चा में है। उसकी वकील अल्मा डेविड ने बताया कि एक अमेरिकी जज ने पहले ही उसे अफगानिस्तान वापस भेजे जाने से सुरक्षा प्रदान की थी। अदालत ने माना था कि युवक को अफगानिस्तान भेजने पर तालिबान से उसके जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों से पता चला कि युवक के परिवार को तालिबान की ओर से लगातार धमकियां मिल रही थीं क्योंकि उसके भाइयों ने अमेरिकी सेना के समर्थन में काम किया था।
युवक के एक भाई ने अफगान नेशनल आर्मी में सेवा दी थी और वह वर्तमान में अमेरिका में रहता है। यह सेना 2021 में तालिबान के सत्ता में आने से पहले अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम करती थी। युवक का दूसरा भाई अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित एक पायलट था, जिसकी तालिबान ने हत्या कर दी थी। इन तमाम खतरों और अदालती सुरक्षा के बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने कानूनी खामी (लीगल लूपहोल) का इस्तेमाल किया और उसे तीसरे देश के समझौते के तहत मध्य अफ्रीकी गणराज्य भेज दिया।
कानूनी खामियां और तीसरे देश के समझौते
ट्रंप प्रशासन की इस नीति के तहत थर्ड कंट्री एग्रीमेंट्स का उपयोग किया जा रहा है। आव्रजन वकीलों का कहना है कि इस प्रथा का इस्तेमाल एक कानूनी रास्ते के रूप में किया जा रहा है ताकि उन शरण चाहने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों से दूर रखा जा सके जहां से वे भागकर आए थे, भले ही उन्हें उनके मूल देश नहीं भेजा जा सकता। इस तरह के गुप्त समझौतों की एक श्रृंखला के माध्यम से, प्रशासन ने हजारों लोगों को दो दर्जन से अधिक ऐसे देशों में निर्वासित कर दिया है जो उनके अपने देश नहीं हैं।
मानवाधिकार संगठनों के सवाल और पिछली उड़ानें
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स फर्स्ट की नीति निदेशक सावी आर्वी ने इस कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि जून के बाद से मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लिए यह दूसरी ऐसी उड़ान थी। इससे पहले जून में भी लगभग दो दर्जन प्रवासियों को वहां भेजा गया था, जिनमें एक ईरानी महिला भी शामिल थी जिसे अपने देश में उत्पीड़न का डर था और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि प्रशासन अपने आव्रजन अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रवासियों को असुरक्षित स्थितियों में धकेल रहा है। वकीलों का कहना है कि यह नीति उन लोगों के साथ विश्वासघात है जिन्होंने अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी।