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: NEET पेपर लीक: दिनेश बिवाल की BJP में किसने कराई एंट्री? पार्टी के भीतर उठे सवाल

- NEET पेपर लीक: दिनेश बिवाल की BJP में किसने कराई एंट्री? पार्टी के भीतर उठे सवाल
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NEET के पेपर लीक मामले ने 3 मई को हुई परीक्षा को विवादों के घेरे में ला दिया है, जिसके बाद से जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। इस मामले की परत दर परत जांच करने में जुटी सीबीआई को पेपर लीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण लिंक हाथ लगे हैं। इसी कड़ी में जयपुर के जमवारामगढ़ से दिनेश बिवाल की गिरफ्तारी हुई है, जिसने राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी है और दिनेश बिवाल की राजनीतिक यात्रा और अब उससे नेताओं के पल्ला झाड़ने की कहानी काफी दिलचस्प मोड़ ले चुकी है। कभी डिजिटल क्रिएटर, कभी बीजेपी नेता, कभी पदाधिकारी और कभी प्रॉपर्टी डीलर के रूप में अपनी पहचान बताने वाले दिनेश बिवाल को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

दिनेश बिवाल की बदलती पहचान और लाइफस्टाइल

जमवारामगढ़ का यह चेहरा पिछले 2 सप्ताह में अचानक सुर्खियों में आ गया है। दिनेश बिवाल ने बीते 18 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया पेज पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें लिखा था कि इस दुनिया में अपना केवल समय है, समय सही है तो सब अपने हैं, वरना कोई नहीं। सीबीआई की गिरफ्त में आने के बाद उसकी यह पोस्ट अब चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर भी उत्सुकता है कि पिछले कुछ वर्षों में उसकी जीवनशैली में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया। लोग उसे एक प्रॉपर्टी कारोबारी के रूप में जानते थे, लेकिन उसकी राजनीतिक सक्रियता ने सबको हैरान कर दिया था।

बीजेपी संगठन में एंट्री पर सस्पेंस

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी के पदाधिकारी के रूप में संगठन में उसकी एंट्री किसने कराई? दिनेश बिवाल ने कई पोस्टरों, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पोस्ट में खुद को बीजेपी का पदाधिकारी बताया है। कुछ सूत्रों का दावा है कि वह जयपुर देहात बीजेपी में मुख्य संगठन का जिला मंत्री था, जबकि कुछ उसे युवा मोर्चा का जिला मंत्री बताते हैं। सवाल यह है कि क्या उसे संगठन में सीधे वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी या वह युवा मोर्चा के जरिए आगे बढ़ा था? इस मुद्दे पर बीजेपी के अंदरखाने में भी खींचतान देखने को मिल रही है।

नेताओं की सफाई और पल्ला झाड़ने की कोशिश

भाजयुमो के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष शंकर गौरा ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अभी जयपुर ग्रामीण जिले में अपनी टीम में कोई नियुक्ति नहीं की है। उनसे पहले अंकित चेची के कार्यकाल में भी ज्यादा नियुक्तियां नहीं हुई थीं और जब इस मामले की गहराई में जाते हैं, तो जयपुर ग्रामीण जिले के पूर्व जिलाध्यक्षों अमित शर्मा और बलराम दून का नाम सामने आता है। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने दिनेश बिवाल को कोई जिम्मेदारी देने या बैठकों में बुलाने से इनकार किया है। बलराम दून ने स्वीकार किया कि जब वह साल 2011 में भाजयुमो के जिलाध्यक्ष बने थे, तब दिनेश बिवाल पूर्ववर्ती टीम में प्रदेश मंत्री के रूप में शामिल था। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय महेंद्रपाल मीणा उनकी टीम में थे, जो आज विधायक हैं और बिवाल के साथ उनकी कई तस्वीरें मौजूद हैं।

विधायक महेंद्रपाल मीणा का पक्ष

विधायक महेंद्रपाल मीणा ने इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते कई लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते रहते हैं। हालांकि, चर्चा यह भी है कि दिनेश बिवाल को पार्टी में जो भी काम या पहचान मिली, वह बड़े नेताओं की सिफारिश पर मिली। बिवाल की सिफारिश करने वालों में जमवारामगढ़ के पूर्व विधायक जगदीश मीणा और मौजूदा विधायक महेंद्रपाल मीणा का नाम लिया जा रहा है। बिवाल के सोशल मीडिया पेज पर लगभग हर दूसरी फोटो में वह महेंद्रपाल मीणा के साथ नजर आता है या उन्हें बधाई देता दिखता है।

कांग्रेस का हमला और बीजेपी का जवाब

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल किया है कि अगर दिनेश बिवाल बीजेपी का पदाधिकारी रहा है, तो पार्टी ने उसे अब तक बर्खास्त क्यों नहीं किया? टीकाराम जूली ने कहा कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक के मामले शतक के करीब पहुंच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिवाल की 8 से 10 बीजेपी नेताओं के साथ तस्वीरें और विज्ञापन मौजूद हैं, जो महज इत्तेफाक नहीं हो सकते। जूली ने पूछा कि क्या सरकार बड़े मगरमच्छों को बचाने की कोशिश कर रही है? वहीं, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दिनेश बिवाल उनका कार्यकर्ता है ही नहीं। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अगर केवल फोटो को आधार बनाया जाए, तो कांग्रेस के भी कई नेताओं के फोटो अपराधियों के साथ मिल जाएंगे।

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