नेपाल बाढ़ संकट: 5500 लोग लापता फिर भी 900 कर्मचारियों पर क्यों है विशेष फोकस?

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नेपाल बाढ़ संकट: 5500 लोग लापता फिर भी 900 कर्मचारियों पर क्यों है विशेष फोकस?
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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के 13 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है और 5500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस विशाल मानवीय आपदा के बीच नेपाली बचाव दलों ने अपना पूरा ध्यान विशेष रूप से 900 पनबिजली परियोजना कर्मचारियों की तलाश पर केंद्रित कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार इन 900 लापता कर्मचारियों में से लगभग 121 लोगों के हिमालयी क्षेत्रों में स्थित पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों के भीतर फंसे होने की प्रबल आशंका है। यही मुख्य कारण है कि बचाव अभियान का वर्तमान केंद्र इन सुरंगों और उनके आसपास के इलाकों तक सीमित हो गया है। बचाव दल इस उम्मीद में काम कर रहे हैं कि सुरंगों की विशेष बनावट शायद कुछ जिंदगियों को बचाने में सहायक सिद्ध हुई हो।

सुरंगों में बचाव अभियान का मुख्य कारण

सेना के बचाव दलों का मानना है कि पनबिजली परियोजनाओं से लापता हुए सभी 900 लोग अनिवार्य रूप से सुरंगों के अंदर ही नहीं हैं। इनमें से कई लोग आपदा के समय पावर प्लांट के अन्य हिस्सों या बाहरी परिसरों में कार्यरत रहे होंगे। इसके बावजूद सुरंगों पर ध्यान केंद्रित करने का एक बड़ा वैज्ञानिक और तकनीकी कारण है। बचाव कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल सांसद श्री राम न्यूपाने ने जानकारी दी है कि सुरंगों के भीतर अक्सर हवा की जेबें यानी एयर पॉकेट्स मौजूद होते हैं। इसके अलावा इन परियोजनाओं के डिजाइन में रहने की जगह और विशेष कमरे भी बनाए जाते हैं। बचाव दलों को उम्मीद है कि इन सुविधाओं के कारण कुछ कर्मचारी इतने दिनों बाद भी वहां जीवित बचे हो सकते हैं। हालांकि अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वास्तव में कितनी संख्या में लोग वहां फंसे हैं और उनकी वर्तमान स्थिति कैसी है।

सांसद श्री राम न्यूपाने ने रॉयटर्स को बताया कि सोमवार को रसुवा जिले की चिलिमे पनबिजली परियोजना के छह लापता कर्मचारियों में से चार की तलाश की जा रही थी। उनके अनुसार इन लोगों के अभी भी जीवित होने की संभावना बनी हुई है। अधिकारियों ने चिलिमे परियोजना के बचाव कार्य के लिए आवश्यक विशेष उपकरण और तकनीकें भी प्राप्त कर ली हैं। बचाव दलों का तर्क है कि सुरंगों के भीतर सुरक्षित स्थान होने के कारण वहां लंबे समय तक जीवन की संभावना बनी रहती है।

चार लोगों के बचाव से जगी नई उम्मीद

हाल के दिनों में मलबे और सुरंगों से चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जिससे राहतकर्मियों और लापता लोगों के परिवारों में उम्मीद की किरण जगी है और शनिवार को एक चीनी नागरिक को सफलतापूर्वक सुरंग से बाहर निकाला गया। इससे पहले शुक्रवार को दो पनबिजली कर्मचारियों को एक अन्य सुरंग से बचाया गया था। इसके अतिरिक्त शनिवार को ही एक नेपाली महिला को उसके मलबे में दबे हुए घर से सुरक्षित निकाला गया। आपदा के 13 दिन बीत जाने के बाद भी इन लोगों का जीवित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना और दुर्गम इलाकों तक पहुंच न पाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

26 अगस्त से शुरू हुआ तबाही का मंजर

इस भीषण आपदा की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर हुई थी। एक ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के कारण भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें नदी में गिर गईं, जिससे अचानक भयानक बाढ़ आ गई और इस बाढ़ ने रास्ते में आने वाले कस्बों और गांवों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। सड़कों और मुख्य राजमार्गों पर मलबे का अंबार लग गया और अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से कम से कम 1380 लोगों की मौत हो चुकी है और 5500 से अधिक लोग लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता की गुहार लगाई है। नेपाल ने विशेष रूप से अधिक क्षमता वाले ड्रोन, बेली ब्रिज, डीएनए जांच किट, सुरंगों में बचाव के लिए विशेष सूट और महामारी को रोकने के लिए चिकित्सा सामग्री की मांग की है।

चीन पर जानकारी साझा करने का दबाव

चीन ने रविवार को सूचित किया कि तिब्बत क्षेत्र में लापता लोगों की तलाश के दौरान बचाव दलों को 12 और शव मिले हैं। लापता लोगों की सूची में कई भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं, जो मानसरोवर झील और माउंट कैलाश की पवित्र यात्रा के लिए तिब्बत गए थे और चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन अपना खोज और बचाव अभियान जारी रखेगा और आपदा के बाद की स्थिति को संभालने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बीजिंग आपदा और बचाव कार्यों से जुड़ी हर ताजा जानकारी तुरंत साझा करेगा। विदेशी पर्यटकों के लापता होने के कारण उनके परिवार चीन सरकार से लगातार जानकारी की मांग कर रहे हैं। इसी दबाव के बीच रविवार को चीन ने पहली बार रॉयटर्स सहित आठ विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कराया।

शोक का 13वां दिन और जेल कर्मियों की बहादुरी

नेपाल में सोमवार को आपदा के बाद शोक का 13वां दिन मनाया गया। हिंदू परंपराओं के अनुसार यह शोक का अंतिम दिन होता है। इस अवसर पर सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया। हालांकि सरकार ने किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया। नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के फनिंद्र पौडेल ने पुष्टि की कि प्रभावित क्षेत्रों में खोज अभियान निरंतर जारी है और राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने भी सोमवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इसी बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने नुवाकोट जिला जेल के सुरक्षा कर्मियों की प्रशंसा की, जिन्होंने बाढ़ के दौरान अपनी सूझबूझ से 923 कैदियों की जान बचाई। उन्हें समय रहते सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर बनी इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया था और शाह ने यह भी बताया कि बाढ़ के शुरुआती समय में जेल की दीवार और गेट तोड़कर भागे 50 कैदियों को भी बाद में पुलिस ने फिर से पकड़ लिया है।

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