नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित पहाड़ी इलाकों में आई भीषण तबाही का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में उस खौफनाक मंजर को कैद किया गया है जब एक विशाल ग्लेशियर अचानक ढह गया, जिससे सीमावर्ती इलाकों में प्रलयकारी मडस्लाइड यानी कीचड़ का बहाव शुरू हो गया और इस प्राकृतिक आपदा ने अब तक भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, 2000 से भी अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। यह वीडियो उस तबाही की भयावहता को दर्शाता है जिसने 26 अगस्त को सीमा के दोनों ओर के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था।
पर्यटक के कैमरे में कैद हुई आपदा की शुरुआत
यह महत्वपूर्ण वीडियो चीन के शिजैंग ऑटोनॉमस रीजन के गिरोंग काउंटी में एक पर्यटक द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। वह पर्यटक उस समय ऊंचे पहाड़ी इलाकों की खूबसूरती को अपने कैमरे में उतार रहा था, तभी अचानक उसके कैमरे में ग्लेशियर के ढहने की घटना कैद हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फुटेज 26 अगस्त को आई उस आपदा की शुरुआत के बारे में सबसे अहम सबूत हो सकता है जिसने नेपाल और चीन दोनों तरफ भारी जान-माल का नुकसान किया है। फुटेज की जांच कर रहे विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि इसी ग्लेशियर के टूटने से गिरोंग पोर्ट पर भयानक मडस्लाइड हुई थी। पर्यटक द्वारा लिया गया यह वीडियो अब वैज्ञानिकों के लिए शोध का एक बड़ा जरिया बन गया है ताकि इस तरह की घटनाओं के पीछे के कारणों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक पुष्टि
चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज के तहत 'इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेन हजार्ड्स एंड एनवायरनमेंट' के डायरेक्टर कांग शिचांग ने इस वीडियो पर अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणी दी है। उन्होंने कहा कि वीडियो में जो स्थान दिखाई दे रहा है, वह वही जगह है जिसे रिमोट-सेंसिंग तस्वीरों के माध्यम से आपदा के मुख्य स्रोत के रूप में पहचाना गया था। शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह माना जा रहा है कि फुटेज में सीमा के नेपाली हिस्से में ग्लेशियर के ढहने का दृश्य है। इसी घटना ने घटनाओं का एक ऐसा सिलसिला शुरू किया जिससे ग्यिरोंग पोर्ट पर जबरदस्त मडस्लाइड हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेशियर का इतनी ऊंचाई से गिरना अपने आप में एक बड़ी ऊर्जा पैदा करता है, जो नीचे की मिट्टी और चट्टानों को भी अपने साथ बहा ले जाती है।
कैसे नेपाल से चीन तक पहुंची यह तबाही
इस भीषण आपदा की शुरुआत नेपाल के ऊंचे पहाड़ी इलाकों से हुई। वहां बर्फ और चट्टानों का एक बहुत बड़ा हिस्सा मुख्य ग्लेशियर से अलग होकर नीचे की ओर गिर गया और इसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में बर्फ, चट्टानें और मलबा पहाड़ी घाटियों में तेजी से बहने लगा। देखते ही देखते यह मलबा एक शक्तिशाली और विनाशकारी बहाव में बदल गया जो नेपाल की सीमा को पार करते हुए चीन की ओर बढ़ गया। इस बहाव ने जिजैंग में स्थित गिरोंग पोर्ट इलाके को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया और वहां भारी तबाही मचाई। मलबे का यह प्रवाह इतना शक्तिशाली था कि इसके रास्ते में आने वाली हर चीज मलबे के नीचे दब गई।
आपदा के आंकड़े और तकनीकी विवरण
चीनी मीडिया द्वारा जारी की गई रिपोर्टों के अनुसार, ग्लेशियर का यह हिस्सा लगभग 5140 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर ढहा था। इस आपदा ने लगभग 620000 वर्ग मीटर के एक विशाल इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। मलबे का यह खतरनाक बहाव लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए आगे बढ़ा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोंग पोर्ट तक पहुंचने से पहले इस मलबे की ऊंचाई में करीब 3300 मीटर की भारी गिरावट आई। यह पूरा घटनाक्रम इतना तेज था कि ग्लेशियर टूटने के मात्र 7 मिनट के भीतर ही मलबा गिरोंग पोर्ट तक पहुंच गया। इतनी तेज गति के कारण स्थानीय लोगों और वहां तैनात अधिकारियों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर जाने का बिल्कुल भी समय नहीं मिला।
बुनियादी ढांचे को नुकसान और बचाव कार्य
पहाड़ी घाटियों से गुजरते हुए मलबे के इस बहाव ने नेपाल-चीन सीमा के दोनों ओर बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा में कई गांव पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जबकि सड़कें, पुल और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संपत्तियां या तो क्षतिग्रस्त हो गई हैं या पानी और मलबे में बह गई हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और खराब मौसम के कारण बचाव और राहत कार्यों में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और लापता 2000 से अधिक लोगों की तलाश के लिए बचाव दल दिन-रात काम कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों को डर है कि आने वाले समय में और अधिक बाढ़ या मडस्लाइड आ सकती है, जिसके कारण सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।