मध्य-पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और हाल ही में हुए युद्धविराम के बावजूद, नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि ईरान की ओर से उत्पन्न परमाणु खतरा अभी टला नहीं है। एक अमेरिकी टेलीविजन शो को दिए गए अपने विस्फोटक साक्षात्कार में, इजराइली प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से अमेरिका के आगामी प्रशासन को एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सीजफायर का अर्थ यह कतई नहीं है कि इजराइल अपनी सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हो गया है, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। नेतन्याहू का यह संदेश न केवल ईरान के लिए है, बल्कि जो बाइडन के बाद सत्ता में आने वाले ट्रंप प्रशासन और पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
440 किलो संवर्धित यूरेनियम और परमाणु खतरे की गंभीरता
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीबीएस (CBS) के वरिष्ठ पत्रकार स्कॉट पेली के साथ 18 मिनट तक चले एक विस्तृत साक्षात्कार में ईरान के परमाणु भंडार के संबंध में चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। नेतन्याहू ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि ईरान के पास वर्तमान में 440 किलोग्राम 60% संवर्धित (enriched) यूरेनियम का विशाल भंडार मौजूद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मात्रा किसी भी समय एक बड़े खतरे में बदल सकती है। नेतन्याहू ने सख्त लहजे में कहा कि युद्धविराम अपनी जगह पर है, लेकिन परमाणु खतरा अभी भी बना हुआ है। उन्होंने साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि आप वहां जाएंगे और उसे हटा देते हैं, लेकिन अभी काम पूरा होना बाकी है (The work is not over)। उनका यह बयान संकेत देता है कि इजराइल ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर अपनी रणनीति पर अडिग है।
इजराइल की आत्मनिर्भरता और अमेरिकी सैन्य सहायता पर रुख
इस साक्षात्कार के दौरान नेतन्याहू ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बयान दिया, जो इजराइल और अमेरिका के भविष्य के संबंधों को प्रभावित कर सकता है। 8 बिलियन डॉलर की अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने की आवश्यकता है। नेतन्याहू का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि इजराइल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में पूरी तरह से 'स्वतंत्र' (Independent) होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। उनका मानना है कि इजराइल को ऐसी स्थिति में होना चाहिए जहां वह किसी भी बाहरी दबाव या कूटनीतिक बाधा के बिना अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम हो। यह आत्मनिर्भरता की ओर इजराइल का एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन और पाकिस्तान की मध्यस्थता का खंडन
नेतन्याहू के इस कड़े रुख के बाद अमेरिकी राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर नेतन्याहू के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। ट्रंप ने लिखा कि वे इजराइल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और बेंजामिन नेतन्याहू को एक महान नेता बताते हुए कहा कि वे दोनों एक ही विचारधारा पर चल रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में अमेरिका और इजराइल की ईरान के प्रति नीति और भी अधिक आक्रामक हो सकती है। दूसरी ओर, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से जो शांति प्रस्ताव इजराइल को भेजा था, उसे नेतन्याहू सरकार ने पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' करार देते हुए ठुकरा दिया है। इजराइल का स्पष्ट स्टैंड है कि जब तक सारा संवर्धित यूरेनियम ईरान से बाहर नहीं जाता, तब तक किसी भी समझौते पर विचार नहीं किया जाएगा।
IAEA की रिपोर्ट और जमीनी हकीकत के आंकड़े
इजराइल की एकतरफा कार्रवाई की संभावना और भविष्य की रणनीति
नेतन्याहू के बयानों से यह साफ हो गया है कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए 'एकतरफा कार्रवाई' (Unilateral Action) करने से पीछे नहीं हटेगा। जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की बहाली की उम्मीद कर रहा है, वहीं नेतन्याहू का यह कहना कि "काम अभी पूरा नहीं हुआ है", भविष्य में किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की ओर संकेत करता है। इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने पहले ही ईरान के परमाणु ठिकानों की पहचान कर ली है और उनकी नई सूची तैयार है। 8 अप्रैल से लागू सीजफायर के बावजूद लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक झड़पें कम नहीं हुई हैं, जो इस क्षेत्र में अस्थिरता को दर्शाती हैं। आने वाले कुछ हफ्ते पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब यरुशलम के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या यह केवल कूटनीतिक दबाव है या इजराइल सच में किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में है।