राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग, निर्मोही अखाड़ा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, फंड के फॉरेंसिक ऑडिट की अपील

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राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग, निर्मोही अखाड़ा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, फंड के फॉरेंसिक ऑडिट की अपील
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अयोध्या के भव्य राम मंदिर के प्रबंधन और प्रशासन को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। इस मामले में प्रमुख पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़े ने अब देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अखाड़े द्वारा दायर की गई इस नई याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की पुरजोर मांग की गई है। यह याचिका मंदिर के वर्तमान प्रबंधन ढांचे और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है और इसमें सुधार की आवश्यकता पर बल देती है।

फॉरेंसिक ऑडिट और सार्वजनिक ट्रस्ट की मांग

निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुरोध किया है कि राम मंदिर के प्रबंधन के लिए गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आधिकारिक तौर पर एक सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित किया जाए। याचिका में सबसे प्रमुख मांग ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन के फॉरेंसिक ऑडिट को लेकर है। अखाड़े का आरोप है कि वर्तमान ट्रस्ट के गठन और उसके कामकाज के तरीकों में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े आर्थिक मामलों की एक स्वतंत्र जांच अत्यंत आवश्यक है। याचिका में मांग की गई है कि ट्रस्ट की आय, व्यय और फंड के इस्तेमाल का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दान में मिली राशि का उपयोग सही और पारदर्शी तरीके से हो रहा है।

2019 के फैसले के कार्यान्वयन पर सवाल

यह याचिका श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़ा द्वारा महंत राजा रामचंद्राचार्य अतीत गुरु महंत रघुनाथ दासजी महाराज के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में मुख्य रूप से 2019 के ऐतिहासिक फैसले के ईमानदारी से कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। अखाड़े का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में विशेष रूप से निर्देश दिया था कि विवादित स्थल पर निर्मोही अखाड़े की ऐतिहासिक उपस्थिति को देखते हुए उन्हें मंदिर के प्रबंधन में उचित भूमिका और ट्रस्ट में उपयुक्त प्रतिनिधित्व दिया जाए और याचिका के अनुसार, साल 2019 के फैसले के बाद कई साल बीत जाने के बावजूद इन निर्देशों पर पूरी तरह अमल नहीं किया गया है।

निजी ट्रस्ट के रूप में काम करने का आरोप

याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वर्तमान में पर्याप्त वैधानिक निगरानी या जवाबदेही के बिना प्रभावी रूप से एक निजी ट्रस्ट के रूप में काम कर रहा है। अखाड़े का दावा है कि ट्रस्ट की मौजूदा संरचना सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि इतने बड़े धार्मिक और सार्वजनिक महत्व के संस्थान को निजी ट्रस्ट की तरह नहीं चलाया जाना चाहिए, बल्कि इसमें अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता होनी चाहिए।

ट्रस्टी बोर्ड के पुनर्गठन का प्रस्ताव

निर्मोही अखाड़े ने अदालत से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार को ट्रस्ट डीड में उपयुक्त संशोधन करने और ट्रस्टी बोर्ड का पुनर्गठन करने का निर्देश दे।

अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने होने वाली सुनवाई के बाद ही आगे की कार्रवाई और दिशा तय होगी और अखाड़े की इस याचिका ने राम मंदिर ट्रस्ट के भविष्य के प्रबंधन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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