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: NSE पर शुरू हुई EGR ट्रेडिंग: अब शेयरों की तरह खरीदें और बेचें असली सोना

- NSE पर शुरू हुई EGR ट्रेडिंग: अब शेयरों की तरह खरीदें और बेचें असली सोना
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भारतीय निवेशकों के लिए सोने में निवेश करने का तरीका अब पूरी तरह से बदलने वाला है क्योंकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) सेगमेंट की लाइव ट्रेडिंग आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। अब सोना खरीदना और बेचना उतना ही सरल हो गया है जितना कि किसी कंपनी के शेयर खरीदना। इस नई व्यवस्था के तहत निवेशक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से 99 दशमलव 9 प्रतिशत शुद्ध असली सोना खरीद और बेच सकते हैं। इस डिजिटल माध्यम ने सुनार के पास जाने की झंझट और सोने की सुरक्षा या चोरी होने के डर को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

पारदर्शिता और एक समान भाव

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब पूरे देश में सोने का केवल एक ही पारदर्शी भाव होगा। इससे पहले अलग-अलग शहरों और सर्राफा बाजारों में सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिलता था, लेकिन अब एनएसई के इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेशकों को एक समान और सटीक कीमत की जानकारी मिलेगी। यह कदम भारतीय स्वर्ण बाजार में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। भारतीय निवेशकों के लिए सोना हमेशा से एक भरोसेमंद विकल्प रहा है, लेकिन फिजिकल गोल्ड की शुद्धता और उसे सुरक्षित रखने की चिंता हमेशा बनी रहती थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने इसी परेशानी को दूर करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज ने 16 मई को इसका एक मॉक ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया था, जो पूरी तरह सफल रहा था। अब लाइव सिस्टम भी बिना किसी तकनीकी रुकावट के सुचारू रूप से काम कर रहा है।

शेयरों की तरह शुद्ध सोने में निवेश

ईजीआर (EGR) असल में सोने में निवेश करने का एक बेहद आधुनिक और डिजिटल विकल्प है। इसके माध्यम से कोई भी निवेशक सीधे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सोना खरीद और बेच सकता है। इस प्लेटफॉर्म पर 99 दशमलव 9 प्रतिशत (999) से लेकर 99 दशमलव 5 प्रतिशत (995) तक की उच्च शुद्धता वाले सोने में ट्रेडिंग की सुविधा दी गई है। यहां उपलब्ध सोना पूरी तरह फंजिबल होता है, जिसका अर्थ है कि निवेशकों को हर बार क्वालिटी चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अलग-अलग मात्रा यानी डिनोमिनेशन में ट्रेडिंग का विकल्प होने से छोटे रिटेल निवेशकों के साथ-साथ बड़े निवेशक भी अपनी निवेश क्षमता के अनुसार बाजार में हिस्सा ले सकते हैं।

गोल्ड ईटीएफ और ईजीआर में अंतर

बाजार में पहले से मौजूद गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) की तुलना में ईजीआर का मॉडल काफी अलग और उन्नत है। ईटीएफ मूल रूप से एक म्यूचुअल फंड यूनिट की तरह काम करता है, जो केवल सोने की बाजार कीमतों को ट्रैक करता है और इसमें असली सोने की डिलीवरी नहीं मिलती है। इसके विपरीत, ईजीआर में निवेश करने पर निवेशक को सीधे तौर पर सुरक्षित वॉल्ट यानी तिजोरी में रखे फिजिकल गोल्ड का मालिकाना हक मिल जाता है। अगर किसी निवेशक को भविष्य में भौतिक रूप से सोने की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इस डिजिटल होल्डिंग को आसानी से फिजिकल गोल्ड बार में बदलवा सकता है।

सेबी की निगरानी और सुरक्षा तंत्र

इस पूरी ट्रेडिंग व्यवस्था को बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) द्वारा रेगुलेट किया जा रहा है। इसे सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स रेगुलेशन एक्ट 1956 के तहत आधिकारिक तौर पर सिक्योरिटी का दर्जा दिया गया है। निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। जहां एक्सचेंज ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म मुहैया कराता है, वहीं क्लियरिंग कॉर्पोरेशन खरीदार और विक्रेता के बीच सौदे और पैसों का निपटान करता है। निवेशकों की ईजीआर रसीदें डिपॉजिटरी के पास डीमैट खाते में पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं। इसके अलावा, फिजिकल सोने को सुरक्षित रखने, उसे जमा करने और निकासी की पूरी जिम्मेदारी वॉल्ट मैनेजर की होती है, जिससे निवेशकों का भरोसा इस सिस्टम पर बना रहता है।

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