जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस समय शराब की दुकानों के संचालन को लेकर एक बड़ा और गंभीर सियासी विवाद खड़ा हो गया है, जिसने सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर की अंदरूनी कलह और वैचारिक मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है। बारामूला संसदीय क्षेत्र से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला है। सांसद मेहदी ने मुख्यमंत्री पर सीधा आरोप लगाया है कि वे उन चुनावी वादों से पूरी तरह पीछे हट रहे हैं जो नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर की जनता से विधानसभा चुनावों के दौरान किए थे। यह विवाद तब और अधिक गहरा गया जब मुख्यमंत्री ने शराब की दुकानों के संचालन को लेकर सरकार के वर्तमान रुख को स्पष्ट किया, जिसे सांसद ने पार्टी की मूल विचारधारा और जनता के प्रति जवाबदेही के बिल्कुल विपरीत बताया है।
सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के गंभीर आरोप और नाराजगी
सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने समाचार एजेंसी ANI से विशेष बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा दिए गए बयानों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री का जवाब पूरी तरह से 'अहंकार से भरा' था और उसमें किसी भी प्रकार का ठोस तर्क या लॉजिक मौजूद नहीं था। मेहदी के अनुसार, विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर की जनता से यह साफ और स्पष्ट वादा किया था कि जिन शराब की दुकानों को पूर्ववर्ती प्रशासन द्वारा खोला गया है, उन्हें सत्ता में आने पर बंद कर दिया जाएगा। हालांकि, अब मुख्यमंत्री के बयानों और सरकार की कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मुख्यमंत्री इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील वादे से पीछे हट रहे हैं। सांसद ने इसे जनता के विश्वास के साथ एक बड़ा खिलवाड़ करार दिया है।
भाषा की मर्यादा और भाजपा से तुलना
मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के व्यवहार और उनकी भाषा शैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने इस संवेदनशील सामाजिक मुद्दे पर सवाल पूछने वाले नागरिकों और प्रतिनिधियों को डांटने जैसा व्यवहार किया और उन्हें 'नशेड़ी' तक कह दिया और सांसद ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की अपमानजनक और विभाजनकारी भाषा का इस्तेमाल आमतौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं द्वारा किया जाता है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि अब वही भाषा कश्मीरी लोगों के खिलाफ खुद उनके मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल की जा रही है। मेहदी ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री का यह वर्तमान रवैया और उनकी कार्यशैली नेशनल कॉन्फ्रेंस की उस सोच और नीति के बिल्कुल खिलाफ है, जिसे लेकर पार्टी ने जनता का समर्थन हासिल किया था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का सरकारी नीति पर बचाव
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शराब की दुकानों को लेकर अपनी सरकार की वर्तमान नीति का पुरजोर तरीके से बचाव किया है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक बयानों में यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार शराब के सेवन को किसी भी तरह से प्रोत्साहित या बढ़ावा नहीं दे रही है। उन्होंने इसके पीछे यह तर्क दिया कि सरकार केवल उन लोगों को एक विकल्प प्रदान कर रही है जिनके धर्म और व्यक्तिगत विश्वास में शराब के सेवन की अनुमति दी गई है। अब्दुल्ला ने इस बात को भी रेखांकित किया कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक इतिहास में अब तक किसी भी सरकार ने शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि एक संतुलित प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखना है।
दुकानों के स्थान और नई नीति पर स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं कि शराब की दुकानें ऐसी जगहों पर बिल्कुल न हों जहां वे युवाओं को गलत दिशा में प्रभावित कर सकें या सामाजिक वातावरण को खराब करें। उन्होंने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया कि उनके वर्तमान कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में शराब की कोई भी नई दुकान नहीं खोली गई है और मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान और प्राथमिकता इस बात पर केंद्रित है कि युवाओं को नशे की लत से दूर रखा जाए और उन्हें रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे इस मुद्दे का इस्तेमाल केवल अपनी राजनीतिक असफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी के भीतर चल रहे वैचारिक संघर्ष को सतह पर ला दिया है। जहां एक ओर सांसद मेहदी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र की पवित्रता और नैतिक मूल्यों की दुहाई दे रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला प्रशासनिक जटिलताओं और व्यावहारिक तर्कों के साथ अपनी नीति को सही ठहराने का प्रयास कर रहे हैं और मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं ताकि वे अपनी कमियों और पिछली नाकामियों को जनता की नजरों से छिपा सकें। फिलहाल, शराब की दुकानों के मुद्दे पर शुरू हुआ यह आंतरिक और बाहरी सियासी घमासान थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं और जनता की नजरें अब सरकार के अगले कदमों पर टिकी हैं।