ओमराजे निंबालकर: उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने वाले बागी सांसद ने बताई असली वजह

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ओमराजे निंबालकर: उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने वाले बागी सांसद ने बताई असली वजह
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी को बड़ा झटका देने वाले बागी सांसद ओमराजे निंबालकर का आधिकारिक बयान सामने आया है। धाराशिव से सांसद निंबालकर ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने आखिर क्यों उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया। उनके इस कदम को 'ऑपरेशन टाइगर' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिस पर उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी है और उनके इस निर्णय के पीछे व्यक्तिगत न्याय और क्षेत्रीय विकास की बड़ी भूमिका रही है।

पिता को न्याय दिलाने का संकल्प

ओमराजे निंबालकर ने पाला बदलने की सबसे बड़ी वजह अपने पिता पवनराजे निंबालकर के मामले में न्याय की उम्मीद को बताया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस संबंध में ठोस आश्वासन मिला है। निंबालकर के अनुसार, सरकार ने भरोसा दिया है कि उनके पिता के मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सीबीआई द्वारा चुनौती दी जाएगी। " यह आश्वासन उनके लिए राजनीतिक निष्ठा बदलने का एक प्रमुख आधार बना, क्योंकि वे लंबे समय से अपने पिता के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

गद्दारी और पैसों के आरोपों पर पलटवार

पार्टी छोड़ने के बाद उन पर लग रहे गद्दारी और पैसे लेने के आरोपों पर ओमराजे निंबालकर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "मैं एक छोटा सा पार्टी कार्यकर्ता हूं। अगर मेरा मकसद पैसे कमाना होता, तो मैं 2022 में ही चला गया होता। " उन्होंने अपने विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे उनके विधानसभा क्षेत्र में जाकर आम लोगों से उनके चरित्र और कार्यशैली के बारे में पूछ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता पक्ष के साथ जाने का उनका निर्णय केवल और केवल विकास कार्यों को गति देने के लिए लिया गया है, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए।

सांसद निधि और विकास कार्यों पर सफाई

अपने राजनीतिक रुख को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच निंबालकर ने सांसद निधि के मुद्दे पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया में सांसद निधि को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एक सांसद को पांच वर्ष के कार्यकाल में लगभग 25 करोड़ रुपये की निधि मिलती है। उन्होंने दावा किया कि 2019 से 2024 के अपने पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने उपलब्ध निधि का 100 प्रतिशत उपयोग किया है। वर्तमान कार्यकाल में भी उन्हें जो निधि आवंटित हुई है, उसका उपयोग निर्धारित समय के भीतर किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके संसदीय क्षेत्र में विकास की जरूरतें बहुत अधिक हैं, जबकि उपलब्ध निधि सीमित है। केवल सांसद निधि के आधार पर हर गांव और बूथ तक विकास पहुंचाना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने सत्ता पक्ष के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया।

शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों का पलायन

गौरतलब है कि ओमराजे निंबालकर अकेले नहीं हैं, बल्कि शिवसेना यूबीटी को छोड़कर कुल 6 बागी सांसदों ने एकनाथ शिंदे का हाथ थाम लिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 22 जून को इस बात की पुष्टि की थी। शिंदे ने बताया कि उनके साथ शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टिकर शामिल हैं। इस दौरान शिंदे ने चुटकी लेते हुए कहा, "आज हमारे साथ 6 सांसद शामिल हुए हैं। हमारे पास अब यहां 3 संजय हैं और एक संजय राठौड़ (विधायक) पहले से ही हैं। " उनका यह इशारा परोक्ष रूप से संजय राउत की ओर था।

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