पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी सैन्य संघर्ष के बीच पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य केंद्र क्षेत्र में तेजी से बदलते सुरक्षा हालात और अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का बढ़ता तनाव रहा। यह कूटनीतिक संवाद ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच हवाई हमलों और जमीनी झड़पों की खबरें सामने आई हैं।
तुर्की के साथ कूटनीतिक संवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, मोहम्मद इशाक डार ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान को क्षेत्रीय घटनाक्रमों से अवगत कराया। इस दौरान विशेष रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच उत्पन्न हुई हालिया स्थिति पर चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना अनिवार्य है। पाकिस्तान ने तुर्की को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार के रूप में देखते हुए मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर अपना पक्ष रखा। अधिकारियों के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने उभरते हुए हालातों पर निरंतर नजर रखने और आपसी संपर्क बनाए रखने का निर्णय लिया है।
'ऑपरेशन गजब लिल हक' और सैन्य कार्रवाई का विवरण
विदेश मंत्री इशाक डार ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की ओर से की गई कथित आक्रामकता का जवाब दिया है और उन्होंने तुर्की के समकक्ष को बताया कि पाकिस्तानी सेना ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए 'ऑपरेशन गजब लिल हक' (Operation Ghazb lil Haq) शुरू किया है। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के भीतर विशिष्ट ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। पाकिस्तान का दावा है कि यह कार्रवाई उन तत्वों के खिलाफ की गई है जो पाकिस्तानी सीमा के भीतर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। डार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब देने की क्षमता रखता है।
सैन्य हताहतों और बुनियादी ढांचे के नुकसान का दावा
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने इस सैन्य अभियान के परिणामों को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। आधिकारिक दावों के अनुसार, पाकिस्तानी कार्रवाई में अब तक 133 से ज्यादा अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 200 से अधिक घायल हुए हैं। पाकिस्तान का कहना है कि काबुल, पकतिया और कंधार में अफगान तालिबान के रक्षा ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में अफगान तालिबान की कम से कम 27 चौकियां नष्ट कर दी गई हैं, जबकि 9 अन्य पोस्ट्स पर पाकिस्तानी बलों ने नियंत्रण का दावा किया है। इसके अतिरिक्त, 2 कोर मुख्यालय, 3 ब्रिगेड मुख्यालय, दो गोला-बारूद डिपो और एक लॉजिस्टिक बेस को पूरी तरह से ध्वस्त करने की बात कही गई है।
अफगानिस्तान का पलटवार और सीमा पर तनाव
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की ओर से भी पाकिस्तान के दावों पर प्रतिक्रिया आई है। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की करीब 15 सैन्य चौकियों पर कब्जा करने और फैजाबाद क्षेत्र में जवाबी हमले करने का दावा किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों ओर से भारी गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की खबरें हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह तनाव डूरंड रेखा पर लंबे समय से चले आ रहे विवाद और सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों के आरोपों के कारण और गहरा गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाके अफगान धरती का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते इस संघर्ष ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। तुर्की के साथ पाकिस्तान की यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने और अपनी सैन्य कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है और सीमावर्ती इलाकों से नागरिकों के विस्थापन और सैन्य जमावड़े ने मानवीय संकट की स्थिति भी पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप लेगा या कूटनीतिक माध्यमों से इसे नियंत्रित किया जा सकेगा।