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पाकिस्तान के हवाई हमलों से अफगानिस्तान में तनाव, 17 की मौत

पाकिस्तान के हवाई हमलों से अफगानिस्तान में तनाव, 17 की मौत
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमावर्ती तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में स्थित सात अलग-अलग ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 17 लोगों की जान चली गई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इन कार्रवाइयों को अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए दावा किया है कि ये हमले उन आतंकी समूहों के खिलाफ किए गए हैं जो पाकिस्तानी धरती पर हालिया आत्मघाती हमलों के लिए जिम्मेदार हैं।

अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया और हताहतों का विवरण

अफगानिस्तान के सरकारी प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने आधिकारिक बयान जारी कर हमलों की पुष्टि की है। मुजाहिद के अनुसार, पाकिस्तानी विमानों ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे भारी नागरिक क्षति हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि पक्तिका और नंगरहार प्रांतों में हुई बमबारी में दर्जनों लोग हताहत हुए हैं। अफगान अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ रही है। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, काबुल ने चेतावनी दी है कि इस तरह की उकसावे वाली कार्रवाइयों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में और अधिक कड़वाहट आएगी।

पाकिस्तान का पक्ष और खुफिया जानकारी के दावे

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से खुफिया जानकारी पर आधारित था। तरार के अनुसार, सेना ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उसके सहयोगी संगठनों के सात ठिकानों को निशाना बनाया है और उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (आईएस) के एक सहयोगी गुट के ठिकानों पर भी प्रहार किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का तर्क है कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों की योजना अफगान धरती पर बनाई जा रही है। सरकार ने दोहराया कि पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

हालिया आत्मघाती हमलों की पृष्ठभूमि

यह सैन्य कार्रवाई उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर और बन्नू जिलों में हुए भीषण आतंकी हमलों के बाद की गई है। हाल ही में बाजौर में एक सुरक्षा चौकी को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में 11 सैनिकों और एक बच्चे की मौत हो गई थी। जांच अधिकारियों ने दावा किया था कि हमलावर एक अफगान नागरिक था और इसके अतिरिक्त, बन्नू जिले में एक सैन्य काफिले पर हुए हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल सहित दो सैनिकों की जान चली गई थी। पाकिस्तान की सेना ने इन घटनाओं के बाद स्पष्ट चेतावनी दी थी कि वे दोषियों के खिलाफ उनके ठिकानों की परवाह किए बिना कार्रवाई करेंगे। इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए हमले में भी 31 लोगों की मौत हुई थी, जिसे पाकिस्तान ने सीमा पार से संचालित साजिश का हिस्सा बताया है।

सीमा पर सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियां

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2600 किलोमीटर लंबी सीमा पर तनाव का इतिहास पुराना है, लेकिन हाल के महीनों में इसमें तेजी आई है। पाकिस्तान ने बार-बार तालिबान प्रशासन से आग्रह किया है कि वे अपनी धरती का उपयोग पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दें। हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पिछले साल अक्टूबर में भी पाकिस्तान ने इसी तरह की सैन्य कार्रवाई की थी। वर्तमान स्थिति ने क्षेत्र में सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि दोनों देशों के बीच संवाद की कमी और सैन्य टकराव की बढ़ती घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं और पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अफगानिस्तान अपनी धरती पर मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी रहेंगी।

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