पाकिस्तान की आंतरिक सत्ता संरचना को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान में इस समय सभी बड़े और महत्वपूर्ण फैसले सेना प्रमुख आसिम मुनीर द्वारा लिए जा रहे हैं और रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सरकार पूरी तरह से मुनीर के निर्देशों पर काम कर रही है, विशेष रूप से देश की विदेश नीति के मामले में। सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के साथ दोस्ती बढ़ाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसके पीछे मुख्य दिमाग आसिम मुनीर का ही है। इस कूटनीतिक सक्रियता का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के गंभीर आंतरिक मुद्दों से दुनिया और जनता का ध्यान भटकाना है।
विदेश नीति में रणनीतिक बदलाव
आसिम मुनीर के सेना प्रमुख बनने के बाद से पाकिस्तान ने सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के साथ अपने संबंधों को एक नई दिशा दी है। सऊदी अरब के साथ संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने वहां की सुरक्षा के लिए अपने 8000 सैनिक भेजे हैं। यह कदम मुनीर के आदेश पर ही उठाया गया है ताकि सऊदी अरब के साथ सुरक्षा साझेदारी को मजबूत किया जा सके और बदले में आर्थिक और राजनीतिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
इसी तरह, तुर्की के साथ भी पाकिस्तान के सैन्य संबंध मजबूत हुए हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, जब भारत की ओर से हमले का खतरा महसूस किया जा रहा था, तब तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन उपलब्ध कराए थे। रिपोर्ट बताती है कि मुनीर इन विदेशी संबंधों का सहारा लेकर अपनी कुर्सी और सेना की पकड़ को और अधिक मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
आर्थिक संकट और ध्यान भटकाने की रणनीति
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से विश्लेषण किया गया है कि आखिर पाकिस्तान सरकार विदेश नीति पर इतना जोर क्यों दे रही है। वर्तमान में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। देश में महंगाई का मुद्दा चरम पर है और आम जनता कर्ज के बोझ तले दबी हुई है। सरकार के पास इन आर्थिक समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है और यही कारण है कि सरकार ने अपना पूरा ध्यान विदेश नीति पर केंद्रित कर दिया है ताकि जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं से हटकर अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की ओर जाए।
आर्थिक मोर्चे पर इन प्रयासों के कुछ परिणाम भी देखने को मिले हैं। पाकिस्तान को सऊदी अरब से 3 अरब डॉलर की सहायता राशि प्राप्त हुई है। इसके अलावा, मिस्र और तुर्की के साथ बेहतर संबंधों के कारण अमेरिका के साथ भी पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार आया है। पाकिस्तान ने अब अमेरिका से 10 अरब डॉलर की बड़ी सहायता राशि की मांग की है। साथ ही, उसे तुर्की और मिस्र से भी वित्तीय मदद मिलने की पूरी उम्मीद है।
आंतरिक हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता
आर्थिक संकट के साथ-साथ पाकिस्तान इस समय आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से भी जूझ रहा है। बलूचिस्तान, खैबर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस समय व्यापक हिंसा जारी है। पाकिस्तान की सरकार इन आंतरिक संघर्षों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजरों से छिपाने के लिए विदेश नीति को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी सुर्खियां बटोरी जाएं जिससे पाकिस्तान की एक सक्रिय कूटनीतिक छवि बने और उसके अंदरूनी मसलों पर चर्चा कम हो।
आसिम मुनीर का वर्चस्व और विपक्ष का विरोध
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आसिम मुनीर ही देश के असली नीति नियंता हैं। मुनीर के कहने पर ही पाकिस्तान सरकार ने ईरान से जुड़े मामलों में मध्यस्थता करने की पहल की। मुनीर की रणनीति अमेरिका और चीन, दोनों ही महाशक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखने की है। हालांकि, देश के भीतर चल रहे संघर्षों के कारण सेना की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है जितनी दिखाई देती है।
पाकिस्तान का विपक्ष भी इस समय सेना के खिलाफ काफी आक्रामक है और जहां एक तरफ विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा इमरान खान जेल में बंद हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व गृह मंत्री फजल उर रहमान ने सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। " यह बयान सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।