पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार इन दिनों एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवाद के केंद्र में हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी अमेरिका को साझा की है। इन दावों के अनुसार, डार ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई एक हालिया बैठक के दौरान यह जानकारी दी, जिससे राजनयिक हलकों में खलबली मच गई है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, लेकिन इन आरोपों ने पड़ोसी देशों के बीच विश्वास और पाकिस्तान की मध्यस्थ के रूप में भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लैरी जॉनसन के चौंकाने वाले दावे
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीआईए के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन ने अपने खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इशाक डार ने ईरान के परमाणु रहस्यों का खुलासा किया है और जॉनसन के मुताबिक, पिछले हफ्ते जब डार और मार्को रुबियो की मुलाकात हुई, तब डार ने उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम के इरादों के बारे में कुछ ऐसी नई बातें बताईं जिन्हें सुनकर रुबियो हतप्रभ रह गए थे। इस दावे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मुद्दे पर अमेरिकी कांग्रेस में भी चर्चा की गई।
जॉनसन ने आगे कहा कि डार ने कथित तौर पर अमेरिका को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान के साथ जल्द ही कोई परमाणु समझौता नहीं होता है, तो वह परमाणु हथियार बनाने में सक्षम हो सकता है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से परमाणु मुद्दे पर तनाव बना हुआ है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति
इन आरोपों के बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था (IAEA) के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ईरान के पास 440 किलो यूरेनियम का भंडार है। यह यूरेनियम 60 प्रतिशत तक संवर्धित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस यूरेनियम को 90 प्रतिशत तक संवर्धित कर दिया जाता है, तो इससे बहुत आसानी से परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं। यही कारण है कि ईरान के परमाणु इरादों से जुड़ी कोई भी नई जानकारी वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप की चिंता और इजराइल का अस्तित्व
ईरान के परमाणु हथियार संपन्न होने की संभावना पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी राय स्पष्ट की है। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान के पास परमाणु हथियार आ जाते हैं, तो इससे इजराइल का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उनका मानना है कि परमाणु शक्ति हासिल करने के बाद ईरान सबसे पहले इजराइल पर ही हमला करेगा। इस पृष्ठभूमि में, इशाक डार पर लगे आरोपों ने अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच हलचल पैदा कर दी है।
मार्को रुबियो और पाकिस्तान का खंडन
इन गंभीर आरोपों के बाद आधिकारिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और 2 जून को जब अमेरिकी कांग्रेस में मार्को रुबियो पेश हुए, तो सांसद स्कॉर पेरी ने उनसे इस कथित लीक के बारे में सवाल पूछा। इस पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी के बारे में पता नहीं है और न ही उन्होंने इस संबंध में कुछ सुना है। रुबियो ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार ईरान फिलहाल परमाणु हथियार नहीं बना सकता है।
इसके ठीक दो दिन बाद, 4 जून को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर इन रिपोर्टों का खंडन किया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इशाक डार और मार्को रुबियो की मुलाकात के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। पाकिस्तान ने इन दावों को निराधार बताया है और दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका
यह मामला इसलिए भी अधिक पेचीदा है क्योंकि पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। एक तरफ ईरान के साथ उसकी सीमाएं जुड़ी हैं और दूसरी तरफ अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में गद्दारी या जानकारी लीक करने के आरोपों से पाकिस्तान की साख पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब वह दो कट्टर प्रतिद्वंद्वियों के बीच बातचीत का जरिया बना हुआ है।