पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा इजराइल के विरुद्ध दिए गए एक अत्यंत विवादास्पद बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है और पाकिस्तानी संसद में संबोधन के दौरान ख्वाजा आसिफ ने इजराइल को 'कैंसर' करार दिया और उसे दुनिया के नक्शे से मिटाने की बात कही। इस बयान के तुरंत बाद इजराइल सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे इजराइल के अस्तित्व पर सीधा हमला बताया है। इजराइल का कहना है कि एक ऐसा देश जो खुद को शांति का मध्यस्थ बताता है, उसकी ओर से इस तरह की भाषा का प्रयोग उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इजराइली विदेश मंत्रालय का तीखा पलटवार
इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पाकिस्तान के इन आरोपों को 'खुलेआम यहूदी-विरोधी' करार दिया है। उन्होंने आधिकारिक बयान में कहा कि इजराइल इन आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। सार के अनुसार, किसी संप्रभु राष्ट्र को 'कैंसर' कहना वास्तव में उसके विनाश का आह्वान करने जैसा है। इजराइली अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे उन ताकतों के खिलाफ अपना बचाव करना जारी रखेंगे जो उनके अस्तित्व को मिटाने की कसम खाते हैं। इजराइल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस तरह की भड़काऊ बयानबाजी का संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता और पाकिस्तान की भूमिका
यह विवाद ऐसे समय में उत्पन्न हुआ है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत निर्धारित है। पाकिस्तान इस वार्ता में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा कर रहा है। हालांकि, इजराइल ने अब पाकिस्तान की इस भूमिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। इजराइली नेतृत्व का मानना है कि पाकिस्तान पूरी तरह से तटस्थ नहीं है और वह ईरान को खुश करने के लिए इस तरह के बयान दे रहा है। इस कूटनीतिक टकराव ने मध्य पूर्व में तनाव कम करने के प्रयासों को एक बड़ा झटका दिया है।
इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और दो दिन की छुट्टी
ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली इस उच्च स्तरीय वार्ता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं और सुरक्षा कारणों से राजधानी में दो दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इस वार्ता का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ रहे तीसरे विश्व युद्ध के खतरे को टालना है। हालांकि, इजराइल के साथ पैदा हुए इस नए विवाद ने वार्ता के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
क्षेत्रीय भू-राजनीति पर बयान के दूरगामी प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का यह बयान केवल इजराइल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत के साथ उसके संबंधों पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तानी संसद में चर्चा के दौरान भारत और इजराइल दोनों को साझा दुश्मन के रूप में पेश किया गया। इस तरह की बयानबाजी से दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के समीकरण और अधिक जटिल होने की संभावना है और इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान इस कूटनीतिक संकट के बीच अपनी मध्यस्थ की भूमिका को बचा पाएगा।