पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है और इस बार यह टकराव सीधे तौर पर सेना और पुलिस बल के बीच होता दिख रहा है। पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर के इशारे पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की एकमात्र प्रांतीय सरकार को सस्पेंड कर दिया गया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के तहत सरकार के मुखिया सोहेल अफरीदी समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब सोहेल अफरीदी इमरान खान को आडियाला जेल से रिहा कराने के लिए पूरे पाकिस्तान में एक विशाल पैदल यात्रा शुरू करने की योजना बना रहे थे। इस घटनाक्रम को जनरल आसिम मुनीर और इमरान खान के बीच चल रही सत्ता की जंग का एक नया और खतरनाक मोड़ माना जा रहा है।
पुलिस बल के भीतर विद्रोह की स्थिति
इसी बीच रावलपिंडी से आई एक रिपोर्ट ने शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा दी है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और सेना की योजना पंजाब प्रांत के 40000 पुलिसकर्मियों को खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में तैनात करने की थी। खैबर पख्तूनख्वाह को लंबे समय से इमरान खान का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि, इस योजना को तब बड़ा झटका लगा जब पुलिसकर्मियों ने इस तैनाती का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। इतनी बड़ी संख्या में पुलिस जवानों का आदेश मानने से इनकार करना पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विरोध के पीछे के मुख्य कारण
पुलिसकर्मियों के इस विद्रोह के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं हैं, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में जिन पुलिसकर्मियों को इमरान खान के समर्थकों को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया था, उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई है। इन जवानों का कहना है कि उन्हें दूर-दराज के इलाकों में ड्यूटी पर तो भेज दिया गया, लेकिन वहां उनके रहने और खाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई। पुलिस के जवानों को बासी और खराब खाना खाने के लिए मजबूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य बिगड़ने से 5 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद अब पंजाब पुलिस के जवान खैबर जाने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि वे मुख्यालय के उन आदेशों का पालन नहीं करेंगे जो उनकी जान को जोखिम में डालते हैं। जवानों ने स्पष्ट किया है कि वे उस सरकार के लिए अपनी जान दांव पर नहीं लगाएंगे जो उनके कल्याण के बारे में नहीं सोचती।
खैबर में पंजाब पुलिस की तैनाती का रणनीतिक महत्व
शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की जोड़ी के लिए खैबर पख्तूनख्वाह हमेशा से एक कठिन चुनौती रहा है। साल 2024 में हुए पाकिस्तान के आम चुनावों में खैबर ही वह एकमात्र प्रांत था जहां सत्ताधारी गठबंधन का जादू नहीं चल पाया और वहां इमरान खान की पार्टी ने अपनी सरकार बनाई। शहबाज शरीफ की पार्टी के नेताओं का आरोप है कि खैबर की प्रांतीय सरकार आतंकियों के साथ मिली हुई है। इसके अलावा, संघीय सरकार को खैबर की स्थानीय पुलिस पर भी भरोसा नहीं है। यही कारण है कि पंजाब से पुलिस बल को वहां भेजने की योजना बनाई गई थी, क्योंकि पंजाब में शहबाज शरीफ की भतीजी मरियम नवाज की सरकार है। सरकार को उम्मीद थी कि पंजाब पुलिस के जरिए वे इमरान के गढ़ में अपनी पकड़ मजबूत कर सकेंगे, लेकिन अब पुलिस के भीतर से उठ रही विद्रोह की आवाजों ने सरकार की मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है।
आईजी पंजाब का बयान और भविष्य की अनिश्चितता
इस पूरे विवाद पर पाकिस्तान के पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और उन्होंने कहा कि अभी तक खैबर पख्तूनख्वाह में पुलिस की बड़े पैमाने पर तैनाती का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब भी इस तरह का कोई फैसला लिया जाएगा, तो पुलिसकर्मियों की समस्याओं और उनके मसलों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, आईजी के इस बयान के बावजूद पुलिस बल के भीतर असंतोष कम होता नहीं दिख रहा है। 40000 पुलिसकर्मियों का यह रुख पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। जैसे-जैसे इमरान खान और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच की लड़ाई तेज हो रही है, पाकिस्तान का प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र गहरे संकट में घिरता जा रहा है।