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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कल, सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कल, सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार
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संसद के बजट सत्र के एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में सोमवार, 2 फरवरी से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने जा रही है। लोकसभा में दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाली इस बहस के लिए कुल 18 घंटे का समय आवंटित किया गया है। यह चर्चा न केवल सरकार की नीतियों के प्रदर्शन का मंच होगी, बल्कि विपक्ष के लिए भी विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने का एक प्रमुख अवसर प्रदान करेगी। संसदीय परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद दोनों सदनों में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाता है, जिस पर विस्तृत चर्चा के बाद प्रधानमंत्री अपना उत्तर देते हैं।

चर्चा की रूपरेखा और मुख्य वक्ता

लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, चर्चा की शुरुआत सत्ता पक्ष की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता सर्वानंद सोनोवाल करेंगे। उनके संबोधन के बाद, भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता तेजस्वी सूर्या पार्टी का पक्ष रखेंगे। सत्ता पक्ष की रणनीति राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को रेखांकित करने की है। चर्चा के लिए आवंटित 18 घंटे के समय को विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच उनकी सदस्य संख्या के आधार पर विभाजित किया गया है। सोमवार को ही राज्यसभा में भी दोपहर 2 बजे से इस विषय पर चर्चा शुरू होगी, जहां भाजपा की ओर से सदानंद मास्टर और मेघा विश्राम कुलकर्णी चर्चा का नेतृत्व करेंगे।

विपक्ष की रणनीति और राहुल गांधी का संबोधन

विपक्ष की ओर से इस चर्चा में सबसे अधिक ध्यान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संबोधन पर रहेगा। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी 2 फरवरी को ही अपना पक्ष रख सकते हैं। कांग्रेस के व्हिप मोहम्मद जावेद ने संकेत दिया है कि पार्टी चाहती है कि राहुल गांधी इस बड़ी बहस में प्रमुखता से बोलें। विपक्ष द्वारा मुख्य रूप से बेरोजगारी, महंगाई, एमजीएनआरईजीए की स्थिति, और हालिया यूजीसी विवाद जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी की गई है। इसके अतिरिक्त, चुनाव मतदाता सूची की चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर भी विपक्ष सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकता है और कांग्रेस के भीतर वक्ताओं की सूची लंबी होने के कारण पार्टी नेतृत्व समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है।

बजट पर चर्चा और आगामी विधायी कार्य

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा समाप्त होने के तुरंत बाद, संसद का ध्यान केंद्रीय बजट 2026-27 की ओर केंद्रित होगा। सूत्रों के अनुसार, बजट पर आम चर्चा के लिए 5, 9, 10 और 11 फरवरी की तारीखें तय की गई हैं। इस चर्चा के लिए भी कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 फरवरी को बजट पर हुई चर्चा का जवाब देंगी। मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सरकार को जवाबदेह ठहराएंगे।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और प्रधानमंत्री का जवाब

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनेगा। जहां सरकार अपनी विकासवादी छवि को मजबूत करने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष एकजुट होकर सरकार की प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करने की कोशिश करेगा। चर्चा के समापन पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी को लोकसभा में अपना जवाब देंगे। इसके अगले दिन, यानी 5 फरवरी को प्रधानमंत्री राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का उत्तर देंगे। विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का संबोधन आगामी चुनावी राज्यों और राष्ट्रीय राजनीति के लिए सरकार का एजेंडा स्पष्ट करेगा।

निष्कर्षतः, सोमवार से शुरू हो रही यह चर्चा भारतीय संसदीय लोकतंत्र की जीवंतता को प्रदर्शित करेगी। 18 घंटे की इस लंबी बहस में देश के ज्वलंत मुद्दों पर गहन मंथन होने की उम्मीद है। सत्ता पक्ष के जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी जैसे अनुभवी नेता भी राज्यसभा में सरकार का बचाव करते नजर आएंगे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राष्ट्रपति के अभिभाषण के माध्यम से सरकार की नीतियों पर संसद की मुहर लगवाना और लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

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