भारत में ईंधन की कीमतों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया। यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल 2022 के बाद पहली बार ईंधन की कीमतों में इस तरह का बदलाव किया गया है। इस वृद्धि का सबसे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहा इजाफा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आ रही गिरावट है। ईरान युद्ध के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारत की जेब पर पड़ रहा है।
ईरान युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
जब से ईरान युद्ध की शुरुआत हुई है, तब से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 51 प्रतिशत की भारी तेजी देखी जा चुकी है। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार बनी हुई हैं, जो भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाड़ी देशों का कच्चा तेल 72 डॉलर 48 सेंट प्रति बैरल पर था। तब से अब तक ब्रेंट क्रूड के दाम में करीब 51 प्रतिशत की तेजी आई है और अब यह 109 डॉलर 26 सेंट प्रति बैरल पर पहुंच चुका है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई के दाम में 57 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हुआ है। 27 फरवरी को अमेरिकी कच्चे तेल के दाम 67 डॉलर 2 सेंट प्रति बैरल थे, जो अब बढ़कर 105 डॉलर 42 सेंट प्रति बैरल हो गए हैं।
महानगरों में पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम
आईओसीएल के आंकड़ों के अनुसार, 15 मई को हुई बढ़ोतरी के बाद लगातार दूसरे दिन कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि फिलहाल वही कीमतें लागू हैं जो 15 मई को तय की गई थीं। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम 97 रुपये 77 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम 90 रुपये 67 पैसे प्रति लीटर बने हुए हैं। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 108 रुपये 74 पैसे और डीजल की कीमत 95 रुपये 13 पैसे प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 106 रुपये 68 पैसे और डीजल 93 रुपये 14 पैसे प्रति लीटर पर बिक रहा है। चेन्नई की बात करें तो वहां पेट्रोल की कीमत 103 रुपये 67 पैसे और डीजल के दाम 95 रुपये 25 पैसे प्रति लीटर दर्ज किए गए हैं।
रुपये की गिरावट और अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार
भारत इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ जहां कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, वहीं दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। ईरान युद्ध के दौरान रुपये में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। 27 फरवरी को करेंसी मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले 91 रुपये 8 पैसे के स्तर पर था, जिसमें अब तक 5 पॉइंट 19 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। 15 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले 95 रुपये 81 पैसे पर बंद हुआ। इसका अर्थ है कि युद्ध के दौरान रुपये को डॉलर के मुकाबले 4 रुपये 73 पैसे का नुकसान हुआ है। केवल इस हफ्ते के कारोबारी दिनों में ही रुपये को 230 पैसे का नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।