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महंगाई का डबल अटैक: पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते ही ट्रांसपोर्ट हुआ महंगा

महंगाई का डबल अटैक: पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते ही ट्रांसपोर्ट हुआ महंगा
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पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी आम आदमी पर दोहरी मार कर रही है और इससे सीधे तौर पर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ रही है, जिससे आने वाले दिनों में रोजमर्रा की जरूरतों की अन्य चीजों के भी महंगे होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। लोकलसर्किल्स (LocalCircles) द्वारा किए गए एक नए सर्वे में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जो बताती हैं कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि किस तरह से घरेलू बजट और उपभोक्ता व्यवहार को प्रभावित कर रही है।

सर्वे के आंकड़े और भागीदारी

इस सर्वे में भारत के 308 जिलों के घरेलू ग्राहकों से 41,000 से ज्यादा जवाब प्राप्त हुए। जवाब देने वालों में 62 प्रतिशत पुरुष और 38 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो लगभग 42 प्रतिशत लोग टियर-I जिलों से, 31 प्रतिशत टियर-II से और 27 प्रतिशत लोग टियर-III, टियर-IV और टियर-V जिलों से थे। यह व्यापक भागीदारी दर्शाती है कि ईंधन की कीमतों का असर देश के हर कोने में महसूस किया जा रहा है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया इजाफा

ये नतीजे सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के बाद आए हैं और पेट्रोल की कीमत में 2 रुपये 61 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। यह दो हफ्तों से भी कम समय में तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा ईंधन की कीमतों में किया गया चौथा बदलाव है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली में रेगुलर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई है और 102 रुपये 12 पैसे प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि डीजल अब 95 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। 15 मई से अब तक, OMCs ने दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण बढ़ते नुकसान के बीच, पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर 7 रुपये 38 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 7 रुपये 52 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।

दैनिक खर्चों और लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव

लोकलसर्किल्स सर्वे में यह बात सामने आई कि 55 प्रतिशत लोगों ने माना है कि हाल की बढ़ोतरी के कारण उनके ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा, 55 प्रतिशत अन्य लोगों ने कहा कि कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं, जबकि 50 प्रतिशत ने बताया कि विभिन्न सेवाओं की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से आमतौर पर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, जिसका बोझ अक्सर खाने-पीने की चीजों, रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान और दूसरी सेवाओं की बढ़ी हुई कीमतों के जरिए ग्राहकों पर डाला जाता है। इसका मतलब यह है कि जिन घरों में निजी गाड़ियों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता, उन पर भी इसका परोक्ष असर पड़ रहा है। हालांकि, सर्वे में यह भी बताया गया कि लगभग 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी का उनके घर के बजट पर अब तक कोई खास असर नहीं पड़ा है।

उपभोक्ताओं के खर्च करने के बदलते तरीके

ईंधन की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए उपभोक्ता अब अपनी आदतों में बदलाव कर रहे हैं। सर्वे के अनुसार, 71 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे गैर-जरूरी यात्राएं और बाहर घूमना-फिरना कम कर देंगे। सर्वे में यह भी पाया गया कि 35 प्रतिशत लोग अपनी यात्राओं को एक साथ करने और यात्रा की बारंबारता को बेहतर बनाने की योजना बना रहे हैं। वहीं, 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे कम खर्चीले ट्रांसपोर्ट के विकल्पों, जैसे कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार पूल करना या सस्ते ऐप-आधारित सेवाओं की ओर रुख कर सकते हैं। इसके अलावा, 29 प्रतिशत अन्य लोगों ने कहा कि वे ईंधन के खर्च की भरपाई के लिए घर के दूसरे खर्चों में कटौती करेंगे। लगभग एक-चौथाई लोगों ने कहा कि वे यात्रा से जुड़े खर्चों को कम करने के लिए चीजों और सेवाओं के सस्ते या नजदीकी स्रोतों की तलाश करेंगे, जबकि 18 प्रतिशत लोग घूमने-फिरने या दूसरे गैर-जरूरी खर्चों को टालने की योजना बना रहे हैं।

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