जम्मू-कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब तकनीकी खराबी के कारण गोंडोला केबल कार सेवा अचानक बीच रास्ते में ही रुक गई। दोपहर करीब 2 बजे हुई इस घटना ने उस समय हड़कंप मचा दिया जब 65 केबिनों में सवार लगभग 300 पर्यटक जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर हवा में फंस गए। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना, SDRF, फायर ब्रिगेड और पर्यटन विभाग ने एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब 6 घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
तकनीकी खराबी और पर्यटकों में दहशत
बताया गया कि रोपवे सिस्टम का एक महत्वपूर्ण पुर्जा टूट जाने के कारण बेस स्टेशन से फेज 1 (कोंगडोरी) के बीच केबल कार सेवाएं अचानक बंद हो गईं। जैसे ही सिस्टम रुका, 65 केबिन हवा में ही स्थिर हो गए। इन केबिनों में देश-विदेश से आए पर्यटक सवार थे जो गुलमर्ग की बर्फीली वादियों का आनंद लेने पहुंचे थे। अचानक गोंडोला रुकते ही कई पर्यटक घबरा गए और मदद के लिए पुकार लगाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ केबिन काफी ऊंचाई पर फंसे हुए थे, जिससे यात्रियों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं में डर और बेचैनी बढ़ गई थी।
सेना और प्रशासन का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और जम्मू-कश्मीर सरकार तुरंत हरकत में आ गई। भारतीय सेना की विशेष रेस्क्यू टीमें, SDRF के जवान, फायर ब्रिगेड और पर्यटन विभाग के प्रशिक्षित कर्मचारी संयुक्त रूप से राहत कार्य में जुट गए। बचाव अभियान को युद्ध स्तर पर चलाया गया। रेस्क्यू टीमों ने रस्सियों, सीढ़ियों और विशेष सुरक्षा उपकरणों की मदद से फंसे हुए लोगों को निकालना शुरू किया। अधिकारियों ने एक रणनीति के तहत उन स्थानों पर ध्यान केंद्रित किया जहां से रोपवे के तारों तक आसानी से पहुंचा जा सकता था। वहां एक-एक करके केबिनों को लाया गया और पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
बचाव कार्य के आंकड़े और प्रक्रिया
रेस्क्यू टीमों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सबसे पहले उन केबिनों पर ध्यान दिया जो सुरक्षित निकासी के करीब थे। जानकारी के अनुसार, फेज 1 की ओर फंसी 14 केबल कारों से 76 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया। वहीं, बेस स्टेशन की तरफ मौजूद 12 केबल कारों से 72 लोगों को बाहर निकाला गया। इस तरह शुरुआती कुछ घंटों में ही 148 पर्यटकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया था। अगले कुछ घंटों में बाकी बचे पर्यटकों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया और टेक्निकल टीम के एक्सपर्ट केबल कारों के सहारे केबिनों तक पहुंचे और पर्यटकों को नीचे उतारने में मदद की।
गुलमर्ग गोंडोला की तकनीकी संरचना
गुलमर्ग रोपवे जिसे गुलमर्ग गोंडोला भी कहा जाता है, इसकी कुल लंबाई करीब 4 किलोमीटर और 200 मीटर है। यह मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित है:
- फेज 1: यह गुलमर्ग रिसॉर्ट से कोंगडोरी घाटी तक जाता है।
- फेज 2: यह कोंगडोरी से शुरू होकर अफरवट चोटी तक जाता है जो 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
सरकार का बयान और जांच के आदेश
जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने पूरी घटना पर निरंतर नजर बनाए रखी। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और प्राथमिकता सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। घटना के बाद गोंडोला प्रबंधन की तकनीकी टीमों ने सिस्टम में आई खराबी की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर किस वजह से मुख्य पुर्जा टूटा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पूरे सिस्टम का गहन निरीक्षण किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
गुलमर्ग: धरती का स्वर्ग
गुलमर्ग जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध हिल स्टेशन है और यह पीर पंजाल रेंज में समुद्र तल से लगभग 2730 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यह श्रीनगर से लगभग 50 से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण इसे 'धरती का स्वर्ग' कहा जाता है। यह एशिया की सबसे ऊंची केबल कार राइड और दुनिया के सबसे ऊंचे गोल्फ कोर्स के लिए मशहूर है। हर साल लाखों पर्यटक यहां की खूबसूरती और स्कीइंग का आनंद लेने आते हैं।