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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द होगी कटौती! हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द होगी कटौती! हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान
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भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम जनता के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद अब घरेलू बाजार में भी ईंधन के दाम कम होने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है। उन्होंने बताया कि यदि हाल के दिनों में कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में निश्चित रूप से कमी देखने को मिल सकती है और यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जून के महीने में 15 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पिछले एक हफ्ते में ही इसमें 8 फीसदी की कमी आई है।

रिफाइनरियों और तेल कंपनियों की वर्तमान स्थिति

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से बताया कि तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वर्तमान में किस स्थिति से गुजर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं जिसे पहले ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में जो कमी आई है, उसका सीधा असर रिटेल फ्यूल यानी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिखने में थोड़ा समय लगेगा। मंत्री ने कहा कि "अभी कंपनियों के पास ऊंची कीमतों पर खरीदा गया कच्चा तेल स्टॉक में मौजूद है। " यह दर्शाता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों पर पैनी नजर रखे हुए है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम और वैश्विक तुलना

मंत्री ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में आने वाली रुकावटों और भू-राजनीतिक तनावों, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की स्थितियों के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार के प्रयासों का बचाव किया। पुरी ने कहा कि अगर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने दी गई है। उन्होंने जानकारी दी कि नरेंद्र मोदी सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। इस कटौती के माध्यम से सरकार ने दोनों ईंधनों पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर का वित्तीय बोझ खुद उठाया है ताकि जनता को महंगाई से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र के 193 देशों की तुलना में केवल जापान ही ऐसा देश है जहां भारत से कम पेट्रोलियम कीमतों में वृद्धि हुई है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कुल बढ़ोतरी लगभग 7 रुपये 60 पैसे तक ही सीमित रही है।

मिडिल ईस्ट संकट और तेल कंपनियों का नुकसान

हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्वीकार किया कि तेल विपणन कंपनियों को वर्तमान में हर दिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए और पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे ईंधन की कीमतों में तेजी आई थी। मिडिल ईस्ट संकट शुरू होने के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखी गई थी। इन बढ़ोतरी से महंगाई और परिवहन लागत बढ़ने की चिंताएं पैदा हुई थीं, जिससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर भी दबाव पड़ा था। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की स्थिति के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।

महानगरों में पेट्रोल और डीजल के वर्तमान दाम

वर्तमान में देश के चारों प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये 12 पैसे और डीजल 95 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल 113 रुपये 51 पैसे और डीजल 99 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल के दाम 111 रुपये 21 पैसे और डीजल 97 रुपये 83 पैसे प्रति लीटर दर्ज किए गए हैं। वहीं चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107 रुपये 77 पैसे और डीजल 99 रुपये 55 पैसे प्रति लीटर पर बनी हुई है। मंत्री के ताजा बयान के बाद इन कीमतों में जल्द ही गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आम आदमी के घरेलू बजट को बड़ी राहत मिल सकती है।

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