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: 24 घंटे में दूसरी बार PM मोदी ने पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की, सोना न खरीदने को कहा

- 24 घंटे में दूसरी बार PM मोदी ने पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की, सोना न खरीदने को कहा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 24 घंटों के भीतर दूसरी बार देश की जनता से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर अपील की है। उन्होंने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने का पुरजोर आह्वान किया है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने लोगों से वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सोना न खरीदने और तेल की खपत में प्रभावी कटौती करने का भी आग्रह किया है। इससे पहले हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि देश के नागरिकों को एक बार फिर उन उपायों को अमल में लाना चाहिए जो कोरोनाकाल के दौरान अपनाए गए थे। इनमें वर्क फ्रॉम होम (घर से काम), ऑनलाइन क्लास और वर्चुअल मीटिंग जैसे विकल्प शामिल हैं और प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनती दिख रही है, जिसका सीधा और गंभीर असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से पीएम मोदी देश के लोगों से उनकी आदतों में थोड़ा बदलाव लाने की अपील कर रहे हैं, ताकि देश पर होने वाले युद्ध के असर को कम किया जा सके।

वैश्विक संकट और युद्ध की आशंका

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और भीषण हमला करने की बात कही है और वहीं, इजरायल ने भी ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। इन घटनाक्रमों के बाद यह आशंका प्रबल हो गई है कि पश्चिमी एशिया में एक बार फिर भीषण युद्ध शुरू हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारत में गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुस, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है, वहां से जहाजों का निकलना मुश्किल हो जाएगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इन्हीं चुनौतीपूर्ण हालातों का सामना करने के लिए पीएम मोदी देश की जनता को पहले से सतर्क कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

कोरोनाकाल से वर्तमान हालातों की तुलना

गुजरात के वडोदरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वर्तमान वैश्विक संकट की तुलना कोविड-19 महामारी के दौर से की। उन्होंने कहा कि जब भी भारत ने युद्ध या किसी बड़े संकट का सामना किया है, देश के नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। हमें अब भी ऐसा ही करना होगा। ईरान युद्ध से बने हालातों पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट इस दशक के सबसे भीषण संकटों में से एक है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस प्रकार भारत ने एकजुट होकर कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त की थी, उसी प्रकार हम इस मौजूदा संकट से भी सफलतापूर्वक उबर जाएंगे। पीएम मोदी ने बताया कि सरकार भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं (Global Supply Chains) में एक प्रमुख और विश्वसनीय भागीदार बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा बचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जनता से ईंधन की खपत कम करने और निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन या इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उपयोग करने का आह्वान किया। सोने की खरीदारी को टालने का आग्रह करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें आयात का उपयोग कम करने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए और उन व्यक्तिगत गतिविधियों से बचना चाहिए जिनमें बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। आयात पर निर्भरता कम करना ही देश को बाहरी झटकों से बचाने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे-छोटे बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर बड़े परिणाम ला सकते हैं और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रख सकते हैं।

तेल और उर्वरक के उपयोग में कटौती का लक्ष्य

हैदराबाद में दिए गए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आंकड़ों के जरिए स्थिति की गंभीरता को समझाया। 85 लाख करोड़ रुपये का तेल आयात किया था। यदि हर भारतीय परिवार अपने दैनिक जीवन में तेल की खपत में थोड़ी भी कमी लाता है, तो खाद्य तेल के आयात में बड़ी गिरावट आएगी और देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और इसके साथ ही, उन्होंने किसानों से एक विशेष अपील करते हुए कहा कि वे फर्टिलाइजर का इस्तेमाल 50 फीसदी तक कम कर दें। प्रधानमंत्री के अनुसार, इससे न केवल अनाज की गुणवत्ता में सुधार होगा और जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को खाद की किल्लत का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। इन सभी उपायों का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक अस्थिरता के बीच देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना है।

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