प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात वीर जवानों के बीच पहुंचकर उनके साथ दीपावली का पावन पर्व मनाया। जवानों के बीच अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बयान देते हुए कहा कि खतरा अभी टला नहीं है क्योंकि जंगलों से तो नक्सली मिट गए हैं, लेकिन दिमागी नक्सली अभी भी मौजूद हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तब बाहरी दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकता है, और जब यही आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है, तभी बाहरी दुश्मन देश पर हावी होता है। प्रधानमंत्री का यह दौरा और उनका संबोधन देश की आंतरिक सुरक्षा और सुरक्षाबलों के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आज देशभर में और दुनिया के कोने-कोने में करोड़ों भारतीय रोशनी का पावन पर्व दिवाली मना रहे हैं। लोग अपने घरों और अपनों के पास लौट रहे हैं। यह परिवारों के एक साथ मिलकर त्योहार मनाने का एक बहुत ही विशेष अवसर होता है। इसी कड़ी में उन्होंने कहा कि वे भी जवानों के बीच दिवाली मनाने के लिए पहुंचे हैं। सीमाओं पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा करने वाले, देश के प्रहरी और भारत माता के वीर बेटे-बेटियां, आप सभी मेरे परिवार के सदस्य हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं और इस बार वे बस्तर के जंगलों में जवानों के साथ दिवाली मनाने आए हैं। यह वही धरती है जहां कभी नक्सलवाद का आतंक हुआ करता था, लेकिन जवानों के त्याग और समर्पण के कारण आज इसी क्षेत्र से नक्सलवाद का खतरा समाप्त हुआ है और विकास की एक नई धारा शुरू हुई है।
इस बार की दिवाली के विशेष होने पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दो हजार छब्बीस की दिवाली बेहद खास है और उन्होंने कहा कि चालीस से पचास साल के लंबे अंतराल के बाद जवानों के लिए ऐसी दिवाली आई है। यह पहली ऐसी दिवाली है, जब देश ने नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों से चली आ रही इस लंबी लड़ाई में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। यह पहली दिवाली है, जब देश का हर एक जिला नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। यह पहली दिवाली है, जब करोड़ों देशवासियों ने नक्सलवाद के खौफ और डर से हमेशा के लिए मुक्ति पाई है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह एक बेहद असाधारण उपलब्धि है और इस सफलता का बहुत बड़ा श्रेय देश के सभी वीर जवानों को जाता है और यह आप जैसे लाखों वीर जवानों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस का ही परिणाम है, जिसके चलते वे आज जवानों के साथ यह पर्व मनाने आए हैं।
इससे पहले आज सुबह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस बात की जानकारी साझा की थी कि वे हमारे बहादुर सुरक्षाबलों के साथ दिवाली का त्योहार मनाने के लिए बस्तर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में उल्लेख किया था कि यह वही इलाका है जहां कभी नक्सलवाद का बोलबाला हुआ करता था और अब इसी क्षेत्र में विकास बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और बस्तर पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद पर पूर्ण विजय हासिल करने के बाद इसे जवानों की पहली दिवाली करार दिया और सभी जवानों को इस बड़ी उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ इस ऐतिहासिक जीत के लिए जवानों के शौर्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों के बलिदान को गहरी नमन किया। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक ऐसा समय भी था जब जितने नक्सली मारे जाते थे, उससे कहीं ज्यादा बड़ी संख्या में हमारे वीर जवान शहीद हो जाते थे। उस समय नक्सली संगठनों के बड़े-बड़े मुखिया अपनी जीत का जश्न मनाया करते थे। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह थी कि तब की सरकारों द्वारा नक्सलवाद को एक लाइलाज बीमारी बताकर यूं ही छोड़ दिया गया था और यह मान लिया गया था कि यह समस्या तो ऐसी ही चलती रहेगी और इसे बदला नहीं जा सकता है।
ऐसी पुरानी सोच और कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'ऐसे ही चलता रहेगा' के इस ढुलमुल अप्रोच से कोई भी देश कभी आगे नहीं चल सकता है। किसी भी देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए और अपने दुश्मनों से निपटने के लिए उनके बुलंद हौसलों को कुचलना ही पड़ता है। इसके लिए जिस मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति की देश को आवश्यकता थी, उस कमी को दो हजार चौदह में दूर किया गया। देश की जनता ने इस प्रधान सेवक को मां भारती की सेवा करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया और उसके बाद से ही देश के हालात और आंकड़े तेजी से बदलने लगे।
प्रधानमंत्री ने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि दो हजार चौदह के बाद से स्थितियां पूरी तरह बदल गईं। हमारे यहां पहले हमेशा यही चर्चा होती थी कि सेना और सुरक्षा बलों के मुकाबले नक्सलियों द्वारा हमारे जवानों को ज्यादा संख्या में मारा जा रहा है। लेकिन पिछले सैंतालीस साल में यह इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक पूरे साल के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के एक भी जवान को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ और सिर्फ हमारे जवानों के अदम्य शौर्य, उनके असाधारण साहस और उनके अनुशासित संयम की ऐतिहासिक जीत है। किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमेशा सही नीयत और सही नीतियों का होना बेहद जरूरी होता है।
सुरक्षा बलों को लेकर पिछली सरकारों की नीतियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों ने हमेशा हमारे सुरक्षा बलों के हाथ बांधकर रखे थे। लेकिन हमारी सरकार ने सुरक्षा बलों को हर जरूरी निर्णय लेने की पूरी आजादी और छूट दी। इसके साथ ही वामपंथी उग्रवाद को जहां-जहां से भी किसी भी प्रकार का सपोर्ट मिलता था, हमने उन सभी रास्तों को रोकने का भी बहुत बड़ा काम किया और हम एक बहुत ही बड़े और स्पष्ट लक्ष्य को लेकर लगातार आगे बढ़ रहे थे। हमारा एकमात्र लक्ष्य यह था कि किसी भी मां की गोद कभी सूनी न हो और देश के किसी भी युवा का भविष्य इस हिंसा की भेंट चढ़कर बर्बाद न हो।
अपनी सरकार के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक हमारा यह महान लक्ष्य पूरी तरह से पूरा नहीं हो गया, तब तक हम अपने संकल्प के साथ लगातार पूरी निष्ठा से डटे रहे। इस दौरान हमने किसी प्रकार का कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया और न ही किसी तरह का कोई दिखावा किया। हमने पूरी संवेदनशीलता के साथ जमीन पर काम करते हुए माओवादी आतंकवाद की कमर हमेशा के लिए तोड़ दी। आज बस्तर और देश के अन्य हिस्सों में जो अमन और चैन दिखाई दे रहा है, वह इसी अटूट संकल्प और सही नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। प्रधानमंत्री के इस प्रेरणादायक संबोधन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की आंतरिक सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और जवानों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है।