18वें ब्रिक्स समिट का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के साथ औपचारिक आगाज हो गया है। पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में ब्रिक्स के नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और इस बार की दो दिवसीय ब्रिक्स समिट को उन्होंने ऐतिहासिक करार दिया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है और उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पूरी तरह से पीपल सेंट्रिक यानी जन-केंद्रित और ह्यूमैनिटी फर्स्ट यानी मानवता प्रथम के दृष्टिकोण पर आधारित है। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को भारत ने अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में रखा है।
यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार की पुरजोर मांग
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के वैश्विक मंच का उपयोग करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की अपनी मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि हमें ग्लोबल रिफॉर्म के लिए अब एक ठोस प्रपोजल तैयार करना चाहिए। पीएम मोदी ने दोटूक शब्दों में कहा कि यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और अधिक समय के लिए टाला नहीं जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस महत्वपूर्ण मामले पर बातचीत को एक निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट नतीजों के साथ जोड़ा जाना अनिवार्य है और यह मांग वैश्विक संस्थानों को वर्तमान समय की वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वैश्विक वित्तीय संस्थानों में बदलाव की आवश्यकता
सुरक्षा परिषद के साथ-साथ पीएम मोदी ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में वोटिंग पावर, लीडरशिप की भूमिकाएं और पॉलिसी की प्राथमिकताएं आज की आर्थिक हकीकत के अनुरूप होनी चाहिए। प्रधानमंत्री का मानना है कि जो देश आज वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक गवर्नेंस को आकार देने में भी उचित और प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने जैसे तीन अहम पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया ताकि एक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था का निर्माण हो सके।
ब्रिक्स के अगले 20 साल के लिए नया रोडमैप
ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर पीएम मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए एक नए और एम्बिशियस यानी महत्वाकांक्षी एजेंडा पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने मानव जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि 20 वर्ष की आयु मैच्योरिटी और रिस्पॉन्सिबिलिटी के नए चरण का आरंभ होती है, जहां सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं। उन्होंने ब्रिक्स को भी इसी 'कमिंग ऑफ एज' के क्षण में बताया और संस्थागत गति को बनाए रखने के लिए पीएम मोदी ने 'ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र' का प्रस्ताव रखा। इसके तहत ट्रोइका के माध्यम से सभी पहलों और परिणामों का फॉलोअप सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे अध्यक्षता बदलने पर भी काम की गति न रुके।
ग्लोबल साउथ की भागीदारी और साझेदारी का मंच
पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज ये देश वैश्विक संकटों का सामना करने में तो सबसे आगे हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें सबसे पीछे रखा जाता है और उन्होंने 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने एक ऐसे मंच की कल्पना की जहां हर देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की बराबर की हिस्सेदारी हो और हर कोशिश के केंद्र में मानवता का विकास हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करता है।