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G20 Summit 2025: G-20 से इतर पीएम मोदी ने कई विश्व नेताओं से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई ऊंचाइयां

G20 Summit 2025: G-20 से इतर पीएम मोदी ने कई विश्व नेताओं से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई ऊंचाइयां
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर। सम्मेलन से इतर कई विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इन मुलाकातों का उद्देश्य भारत के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत करना था और जी-20 शिखर सम्मेलन भारत के लिए द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने का एक बेहतरीन अवसर साबित हुआ।

वैश्विक मुद्दों पर प्रधानमंत्री का ध्यान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इन विश्व नेताओं से मुलाकात के दौरान मुख्य ध्यान वैश्विक समस्याओं और उनके समाधान पर केंद्रित रहा। उन्होंने शनिवार को दुनिया के कई नेताओं के साथ अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत की और "वैश्विक तरक्की और खुशहाली के लिए साझा प्रतिबद्धता" जाहिर की और इन वार्ताओं के माध्यम से, प्रधानमंत्री ने भारत की ओर से वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और उनके स्थायी समाधान खोजने की इच्छा को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को। दोहराया, ताकि एक अधिक समृद्ध और स्थिर विश्व का निर्माण किया जा सके। जोहान्सबर्ग में, प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात की, जिसे उन्होंने "बहुत अच्छा" बताया। उन्होंने कहा कि इस साल भारत-ब्रिटेन भागीदारी में नई ऊर्जा आई है और दोनों देश इसे कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाते रहेंगे और यह मुलाकात दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी तरह, उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलकर "खुशी" व्यक्त की, जिनके साथ उनकी "अलग-अलग मुद्दों पर अच्छी बातचीत हुई। " प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि "भारत-फ्रांस के रिश्ते दुनिया की भलाई के लिए एक ताकत बने हुए हैं! " यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक सहयोग और साझा मूल्यों को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ भी बातचीत की, जिसे उन्होंने "शानदार" करार दिया। उन्होंने कहा कि "भारत के जर्मनी के साथ रिश्ते मजबूत हैं, खासकर व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष और अन्य क्षेत्रों में। " ये सभी मुलाकातें यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण थीं।

एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ भी "अच्छी बातचीत" की। उन्होंने कहा कि भारत और मलेशिया "द्विपक्षीय सहयोग को विविध क्षेत्रों में प्रगाढ़ करने के लिए" मिलकर काम करते रहेंगे। यह वार्ता दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली-जे-म्युंग से प्रधानमंत्री मोदी की इस साल यह दूसरी मुलाकात थी, जिसे उन्होंने "हमारी विशेष रणनीतिक भागीदारी में मज़बूत रफ़्तार का संकेत" बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने "अपने आर्थिक और निवेश जुड़ाव को और गहरा करने के लिए दृष्टिकोण साझा किए। " इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने सिंगापुर के अपने समकक्ष लॉरेंस वोंग से भी मुलाकात की और कहा कि "भारत-सिंगापुर साझेदारी विकास और स्थिरता का एक मुख्य आधार बनी हुई है और " उन्होंने वियतनामी समकक्ष फाम मिन्ह चिन से मुलाकात के बाद ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि "भारत और वियतनाम के बीच एक मजबूत, भविष्यन्मुखी मित्रता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। " ये सभी बैठकें एशिया में भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण थीं।

ब्राजील और अफ्रीकी देशों से संवाद

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "भारत और ब्राजील अपने लोगों के फ़ायदे के लिए कारोबार और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। " यह वार्ता ब्रिक्स जैसे मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं को दर्शाती है। अफ्रीकी महाद्वीप के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी। ने अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ मैनुअल गोंजाल्वेस लौरेंको से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस साल की शुरुआत में दिल्ली में उनका स्वागत करने का सम्मान मिला था और "भारत अंगोला के साथ दोस्ती को महत्व देता है और दोनों देश व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। " इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से भी वार्ता हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि "भारत और इथियोपिया की साझेदारी ऐतिहासिक है और विकास में सहयोग से यह मजबूत हुई है। हम प्रौद्योगिकी, कौशल और दूसरे क्षेत्र में रिश्तों को और मजबूत करते रहेंगे और " उन्होंने सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो से भी मुलाकात की, जो अफ्रीका के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव को दर्शाता है।

अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों से मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस के साथ "बहुत सार्थक" बातचीत की, जो वैश्विक शासन और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के महानिदेशक डॉ और न्गोजी ओकोन्जो-इवेला से भी बातचीत की, जो वैश्विक व्यापार नियमों और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं पर भारत के रुख को स्पष्ट करने का अवसर था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयेसस से मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमेशा की तरह, तुलसी भाई से मिलकर खुशी हुई। भारत हमेशा एक स्वस्थ्य विश्व बनाने में योगदान देगा। " यह टिप्पणी वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और भारत की भूमिका को रेखांकित करती है।

जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत का प्रस्ताव

जी-20 नेताओं की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक विकास मानदंडों पर गहन पुनर्विचार का आह्वान किया। उन्होंने मादक पदार्थ-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए जी-20 पहल तथा एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रतिक्रिया दल बनाने का प्रस्ताव किया। ये प्रस्ताव भारत की ओर से वैश्विक चुनौतियों के लिए ठोस समाधान प्रस्तुत करने की इच्छा को दर्शाते हैं। शिखर सम्मेलन स्थल पर पहुंचने पर, प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को "गर्मजोशी से स्वागत करने और इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए धन्यवाद" दिया। इन सभी मुलाकातों और प्रस्तावों ने जोहान्सबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन को भारत के लिए एक। अत्यंत सफल और उत्पादक मंच बना दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत हुई।

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