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पीएम मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात: ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर हुई विशेष बातचीत

पीएम मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात: ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर हुई विशेष बातचीत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस औपचारिक कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण दृश्य तब देखने को मिला जब प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी का आमना-सामना हुआ। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और कुछ देर तक बातचीत की। हालिया संसद सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रहे तीखे गतिरोध के बाद, सार्वजनिक मंच पर दोनों शीर्ष नेताओं की इस शिष्टाचार भेंट को राजनीतिक गलियारों में विशेष महत्व दिया जा रहा है।

प्रेरणा स्थल पर शिष्टाचार और संवाद

संसद भवन के प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी के पास रुककर उनसे संक्षिप्त चर्चा की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश भी वहां उपस्थित थे। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात के वीडियो और तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें दोनों नेता सहज मुद्रा में संवाद करते नजर आ रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम पूरी तरह से महात्मा फुले को पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित किया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी का सोशल मीडिया संदेश

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महात्मा ज्योतिबा फुले को याद करते हुए एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि महात्मा ज्योतिराव फुले एक दूरदर्शी समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित कर दिया और प्रधानमंत्री ने उन्हें महिलाओं और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की वकालत करने वाला एक अग्रणी व्यक्तित्व बताया। उन्होंने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि फुले के प्रयासों से शिक्षा सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली माध्यम बनी। सरकार इस वर्ष उनकी 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत कर रही है।

महात्मा ज्योतिबा फुले का ऐतिहासिक योगदान

महात्मा ज्योतिराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था और वे 19वीं सदी के भारत के सबसे प्रभावशाली समाज सुधारकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और छुआछूत के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया। 1848 में उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल खोलकर महिला शिक्षा की नींव रखी थी। उनके द्वारा स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने समाज के वंचित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और महात्मा गांधी ने भी उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें 'महात्मा' की उपाधि से संबोधित किया था।

संसदीय परंपरा और गरिमा का प्रदर्शन

प्रेरणा स्थल पर हुई यह मुलाकात संसदीय लोकतंत्र की उस परंपरा को दर्शाती है जहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक साथ नजर आते हैं। कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी ज्योतिबा फुले के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। उपस्थित नेताओं ने फुले के विचारों को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए प्रासंगिक बताया और इस अवसर पर संसद के अन्य वरिष्ठ सदस्य और अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने समाज सुधारक के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।

शिक्षा और समानता के प्रति समर्पण

महात्मा फुले के जीवन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाना था और उन्होंने तर्क दिया था कि शिक्षा के बिना बुद्धि का विकास संभव नहीं है और बुद्धि के बिना विकास की प्रक्रिया अधूरी है। उनके इसी दर्शन को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके विचार समाज की प्रगति की कोशिश में सभी को रास्ता दिखाते रहेंगे। प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को फुले के संघर्षों और उनके द्वारा किए गए सुधारों से अवगत कराना था।

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