पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने शनिवार को राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के दक्षिण कोलकाता स्थित नकटला आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई करोड़ों रुपये के स्कूल शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ी जांच के सिलसिले में की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य घोटाले से संबंधित नए साक्ष्यों को एकत्रित करना और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ना है।
नकटला आवास पर भारी सुरक्षा के बीच छापेमारी
शनिवार सुबह ईडी के अधिकारियों की एक टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ पार्थ चटर्जी के नकटला स्थित आवास पर पहुंची। छापेमारी के दौरान घर के बाहर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था ताकि तलाशी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी के पास इस मामले में कुछ नए इनपुट थे, जिसके आधार पर यह तलाशी ली गई और जांच दल ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच की है।
समन की अनदेखी और पूछताछ की तैयारी
अधिकारियों के मुताबिक, पार्थ चटर्जी को इस मामले में पूछताछ के लिए पहले भी कई बार समन जारी किए गए थे। हालांकि, पूर्व मंत्री ने स्वास्थ्य कारणों और बीमारी का हवाला देते हुए जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने से परहेज किया था। बार-बार समन की अनदेखी के बाद, ईडी ने सीधे उनके आवास पर पहुंचकर कार्रवाई करने का निर्णय लिया। एजेंसी का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं और धन के अवैध हस्तांतरण के बारे में चटर्जी से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है।
प्रसन्ना रॉय के ठिकानों पर भी तलाशी अभियान
पार्थ चटर्जी के आवास के साथ-साथ ईडी की एक अन्य टीम ने न्यू टाउन स्थित प्रसन्ना रॉय के कार्यालय में भी छापेमारी की और प्रसन्ना रॉय को इस शिक्षक भर्ती घोटाले में एक महत्वपूर्ण कड़ी और आरोपी माना जा रहा है। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को खंगालने का प्रयास कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भर्ती प्रक्रिया में किस स्तर पर और किन प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से धांधली की गई थी। अधिकारियों ने वहां से भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि और पूर्व की बरामदगी
यह मामला जुलाई 2022 में उस समय सुर्खियों में आया था जब ईडी ने पार्थ चटर्जी को पहली बार गिरफ्तार किया था। उस दौरान उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवास से लगभग ₹20 crore नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया था। इस बरामदगी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पार्थ चटर्जी को नवंबर में न्यायिक हिरासत से रिहा किया गया था, लेकिन जांच एजेंसियां इस मामले में लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी सरगर्मी
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल कानून के तहत निष्पक्ष जांच को पूरा करना है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।