प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज के साथ फोन पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण वार्ता की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक राजनीति में भारी उथल-पुथल मची हुई है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन वेनेजुएला पर कड़ा दबाव बना रहा है। इस संवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प
पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बातचीत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच एक लंबी और सार्थक चर्चा हुई और इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक गहरा करने और इसका विस्तार करने पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों को छुएंगे। बातचीत के दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
ट्रंप के दबाव और भारत की स्वतंत्र कूटनीति
यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के। सत्ता में आने के बाद से वेनेजुएला पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद यह पहली बार है जब भारत के शीर्ष नेतृत्व ने वेनेजुएला की नई कार्यवाहक सरकार से संपर्क साधा है और भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश के साथ संबंध बनाए रखने के लिए स्वतंत्र है।
ग्लोबल साउथ और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा
दोनों नेताओं ने केवल द्विपक्षीय मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। पीएम मोदी और डेल्सी रोड्रिगेज ने 'ग्लोबल साउथ' के देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर जोर दिया। भारत लगातार विकासशील देशों की आवाज बनकर उभर रहा है। और वेनेजुएला के साथ यह संवाद उसी कड़ी का हिस्सा है। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी निरंतर संपर्क में रहने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई।
ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है और भारत के लिए वेनेजुएला के साथ अच्छे संबंध उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। पिछले कुछ समय में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तेल आयात में बाधाएं आई थीं, लेकिन अब बदली हुई परिस्थितियों में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी भारत की। विशेषज्ञता वेनेजुएला के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।
वाशिंगटन को सीधा संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डेल्सी रोड्रिगेज के साथ पीएम मोदी की यह बातचीत वाशिंगटन को एक सीधा संदेश है। भारत यह दिखाना चाहता है कि उसकी कूटनीति किसी बाहरी दबाव में नहीं आती। हालांकि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हैं, लेकिन वेनेजुएला जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ संवाद बनाए रखना भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप प्रशासन भारत के इस कदम पर क्या प्रतिक्रिया देता है।