PM Narendra Modi: भारत के Zen-G रिस्क लेने से पीछे न हटें, सरकार आपके साथ… ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में बोले PM मोदी

PM Narendra Modi - भारत के Zen-G रिस्क लेने से पीछे न हटें, सरकार आपके साथ… ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में बोले PM मोदी
| Updated on: 13-Jan-2026 07:00 AM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ को संबोधित करते हुए देश के युवाओं को ‘विकसित भारत’ के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रेरित किया। इस संबोधन में, उन्होंने विशेष रूप से भारत की ‘Zen-G’ (जेनरेशन Z) से आह्वान किया कि वे जोखिम लेने से न डरें, क्योंकि सरकार उनके हर प्रयास में उनके साथ खड़ी है। यह संवाद मंच, जैसा कि प्रधानमंत्री ने बताया, बहुत कम समय में ही युवाओं के लिए एक बड़ा और प्रभावशाली प्लेटफॉर्म बन गया है, जहाँ वे देश के विकास की दिशा तय करने में सीधे तौर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

युवाओं का सामर्थ्य, भारत का सामर्थ्य

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि। युवाओं की सफलता ही देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं का सामर्थ्य ही भारत का सामर्थ्य बनेगा। यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जो देश के भविष्य को युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और दृढ़ संकल्प से जोड़ता है। प्रधानमंत्री ने यह भी व्यक्त किया कि युवाओं की ऊर्जा उन्हें स्वयं भी ऊर्जा प्रदान करती। है, जो देश के नेतृत्व और युवा पीढ़ी के बीच एक मजबूत जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने युवाओं में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि हर प्रयास में समाज और देश का हित सर्वोपरि रहे।

स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा और राष्ट्र प्रथम की भावना

अपने संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और विवेकानंद जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि कैसे हम ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना से जीवन जिएं और हमारे हर प्रयास में समाज और देश का हित निहित हो। प्रधानमंत्री ने युवाओं को विवेकानंद जी के आदर्शों का पालन करने और उनके मार्गदर्शक सिद्धांतों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकें। यह प्रेरणा युवाओं को न केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए, बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय उत्थान के लिए भी प्रेरित करती है।

जोखिम लेने की संस्कृति और सरकारी समर्थन

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से भारत की ‘Zen-G’ पीढ़ी से आग्रह किया कि वे जोखिम लेने से पीछे न हटें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार उनके साथ है और उनके नवाचारों तथा उद्यमों को पूरा समर्थन देगी। यह आह्वान एक ऐसे माहौल को बढ़ावा देने के लिए है जहाँ युवा बिना किसी डर। के नए विचारों को आजमा सकें, स्टार्टअप शुरू कर सकें और आर्थिक विकास में योगदान दे सकें। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का Zen-G रचनात्मकता से भरा हुआ है, और इस रचनात्मकता को सही दिशा और समर्थन मिलने पर यह देश के लिए अद्भुत परिणाम दे सकता है। सरकार की यह प्रतिबद्धता युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगी।

‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ का महत्व

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ बहुत कम समय में ही एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। यह प्लेटफॉर्म देश की विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करता है और करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना और देश के विकास के लिए अपने विचार साझा करना अपने आप में अभूतपूर्व है। यह संवाद मंच युवाओं को अपनी आवाज़ उठाने, अपनी चिंताओं को व्यक्त करने और नीति निर्माताओं के साथ सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। यह एक समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है जहाँ देश के भविष्य की योजना में युवा पीढ़ी की राय को महत्व दिया जाता है।

स्टार्टअप क्रांति और नई योजनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने देश के युवाओं पर अपने गहरे भरोसे को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इसी भरोसे के कारण सरकार ने एक अलग राह चुनी। और युवाओं को ध्यान में रखते हुए एक के बाद एक नई योजनाएं बनाईं। इन्हीं योजनाओं और समर्थन के परिणामस्वरूप भारत में स्टार्टअप क्रांति ने असली गति पकड़ी और इन पहलों ने न केवल रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनने और नवाचार के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने के लिए भी सशक्त बनाया है। यह दर्शाता है कि सरकार युवाओं को केवल नौकरी चाहने वालों के रूप में। नहीं, बल्कि नौकरी प्रदाताओं और आर्थिक विकास के इंजन के रूप में देखती है।

ऑरेंज इकॉनमी का अभूतपूर्व विकास

प्रधानमंत्री ने ‘ऑरेंज इकॉनमी’ यानी कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी के अभूतपूर्व विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत आज इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देख रहा है। यह क्षेत्र युवाओं के लिए असीमित अवसर प्रदान करता है, चाहे वह कला, संगीत, फिल्म निर्माण, डिजिटल सामग्री निर्माण या किसी अन्य रचनात्मक उद्योग में हो। ऑरेंज इकॉनमी का विकास न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है और यह युवाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा का उपयोग करके आजीविका कमाने और देश की सॉफ्ट पावर को बढ़ाने का अवसर देता है।

रिफॉर्म एक्सप्रेस और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि बीते दशक में बदलाव और सुधार का जो सिलसिला शुरू किया गया था, वह अब ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ बन चुका है। इन सुधारों के केंद्र में हमारी युवाशक्ति है और उन्होंने देश के हर युवा से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे गुलामी की मानसिकता से देश को बाहर निकालें। यह आह्वान केवल आर्थिक या राजनीतिक सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और वैचारिक क्रांति का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री का मानना है कि जब तक युवा पीढ़ी औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त नहीं होगी, तब तक ‘विकसित भारत’ का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो पाएगा। यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जो आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और स्वदेशी। मूल्यों पर आधारित एक नए भारत के निर्माण पर केंद्रित है।

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