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राजस्थान मौसम: बाड़मेर में पारा 38.3 डिग्री पहुंचा, भीषण गर्मी की चेतावनी।

राजस्थान मौसम: बाड़मेर में पारा 38.3 डिग्री पहुंचा, भीषण गर्मी की चेतावनी।
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राजस्थान में फाल्गुन के महीने में ही भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए असामान्य माना जा रहा है। राज्य के 20 से अधिक जिलों में पारा पहले ही 30 डिग्री के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे दिन के समय लोगों को तेज धूप और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

बाड़मेर और पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का प्रभाव

मौसम विभाग की दैनिक डेटा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान राजस्थान के पश्चिमी इलाकों में गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है। 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सर्वाधिक रहा। इसके साथ ही जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर जैसे जिलों में भी तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। रेगिस्तानी इलाकों में आसमान साफ रहने और शुष्क हवाओं के चलने के कारण धूप की तीव्रता काफी अधिक महसूस की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में गर्मी का असर आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने की संभावना है।

राज्य के 28 जिलों में पारा 30 डिग्री के पार

मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के 28 जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। 1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। 2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है। 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।

मौसम विभाग द्वारा जारी आगामी सप्ताह का पूर्वानुमान

जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य में आगामी एक सप्ताह तक मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने की संभावना है। विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी हो सकती है। इस बदलाव के कारण मार्च की शुरुआत में ही लू जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, वायुमंडल में किसी भी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के अभाव के कारण तापमान में यह निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।

आर्द्रता के स्तर में कमी और शुष्क हवाओं का असर

राज्य में वर्तमान में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) का औसत स्तर 15 से 35 प्रतिशत के मध्य दर्ज किया गया है। वातावरण में नमी की कमी और ह्यूमिडिटी लेवल 40 प्रतिशत से नीचे आने के कारण दिन में उमस भरी गर्मी का अहसास हो रहा है। इसका प्रभाव अब केवल दोपहर तक सीमित नहीं है, बल्कि सुबह और रात के तापमान में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। सीकर और पाली जैसे जिलों में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, लेकिन अन्य शहरों में रातें भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शुष्क हवाओं के कारण वाष्पीकरण की दर बढ़ गई है, जिससे जल स्रोतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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