मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है और इंडिया ब्लॉक द्वारा आज से 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' की शुरुआत की गई है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त, वोट चोरी के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन है। यह मार्च देश के सभी जिलों में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालयों तक निकाला जाएगा, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश देना है।
मुंबई में सीजेपी का कड़ा रुख
मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा संभाला है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने सीजेपी को छत्रपति शिवाजी पार्क में आंदोलन करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। पुलिस का तर्क है कि मुंबई में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन के लिए केवल आजाद मैदान ही अधिकृत स्थान है और इसके अलावा कहीं भी आंदोलन की अनुमति नहीं दी जा सकती। शिवाजी पार्क में अनुमति न मिलने के बाद सीजेपी ने अब 'जेल भरो आंदोलन' का एलान कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन को शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी अपना समर्थन दिया है। सीजेपी की योजना 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शिवाजी पार्क में बड़ा आंदोलन करने की थी, लेकिन पुलिसिया पाबंदियों ने तनाव बढ़ा दिया है।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा का कड़ा पहरा
देश की राजधानी दिल्ली में भी विरोध की गूंज सुनाई दे रही है। जंतर-मंतर पर आज सुबह 11 बजे से धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। इस प्रदर्शन में आइसा (AISA), आरजेडी सांसद मनोज झा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के शामिल होने की उम्मीद है। खुफिया जानकारी के मुताबिक, यहां करीब 5000 लोगों के जुटने की संभावना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। सुरक्षा के मद्देनजर नई दिल्ली इलाके में भारी बैरिकेडिंग की गई है और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें
पार्टी ने यह भी मांग की है कि जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल किया जाए। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों की प्रक्रिया संदिग्ध है और इस पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
आंदोलन का भविष्य
यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में और तेज होने वाला है। 4 अक्टूबर से शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी इस आंदोलन में कूदने वाली है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, 4 से 5000 लोगों की भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए जंतर-मंतर के साथ-साथ आसपास के संवेदनशील इलाकों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन प्रस्तावित इस प्रदर्शन ने प्रशासन की चुनौतियों को बढ़ा दिया है।