पंजाब की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप कार्यालय पर छापेमारी की। यह बड़ी कार्रवाई हाई कोर्ट के उस आदेश के ठीक एक दिन बाद हुई है जिसमें अदालत ने राज्य में तबादलों और नियुक्तियों के मामले में सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस छापेमारी की पुष्टि की और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और उनकी सरकार को बदनाम करने की एक साजिश है।
मुख्यमंत्री का भाजपा पर बड़ा हमला
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पोस्ट में भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने पंजाब चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कैंप ऑफिस पर सीबीआई का छापा इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। मान ने कहा कि अब पंजाब सरकार और उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, पंजाब की जनता से उनकी सरकार को जो प्यार और समर्थन मिल रहा है, उससे भाजपा घबरा गई है और इसी घबराहट में इस तरह की दमनकारी कार्रवाई की जा रही है।
ओएसडी के घर और अन्य ठिकानों पर तलाशी
सीबीआई की यह कार्रवाई केवल मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस तक ही सीमित नहीं रही। जांच एजेंसी की टीम मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के आवास पर भी पहुंची। सूत्रों के अनुसार, पंजाब और चंडीगढ़ में कई अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई है। मंगलवार को जब सीबीआई की टीम मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पहुंची, तो वहां मौजूद दस्तावेजों की गहनता से जांच की गई। बताया जा रहा है कि टीम वहां रखे रिकॉर्ड और फाइलों को खंगाल रही है ताकि भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े सबूत जुटाए जा सकें। यह कार्रवाई 5 अक्टूबर को हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।
क्या है भ्रष्टाचार और ट्रांसफर का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद पंजाब में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों, नियुक्तियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले ही पंजाब के डीजीपी को 3 पत्र लिखे थे। इन पत्रों में ईडी ने गंभीर आरोप लगाए थे कि मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन और उनके कुछ सहयोगी, जिनमें नितिन गोहल और बीर देविंदर के नाम शामिल हैं, भ्रष्टाचार की गतिविधियों में लिप्त थे। ईडी का आरोप है कि ये लोग राज्य में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का एक संगठित रैकेट चला रहे थे। इन पत्रों के माध्यम से ईडी ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी।
सरकारी टेंडरों में दखल के आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल अधिकारियों के तबादलों तक ही सीमित नहीं है। ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन पर यह भी आरोप है कि वह प्रशासनिक नियुक्तियों के साथ-साथ सरकारी टेंडरों के आवंटन में भी अवैध रूप से दखल दे रहे थे। एजेंसियों का दावा है कि सरकारी कामकाज में इस तरह के हस्तक्षेप से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और सीबीआई अब उन सभी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है जो इस कथित भ्रष्टाचार के खेल से जुड़ी हुई हैं। यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब सुप्रीम कोर्ट में भी ट्रांसफर, पोस्टिंग और सरकारी कामकाज में कथित दखल से जुड़े एक मामले की सुनवाई होनी है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक सरगर्मी
सीबीआई की इस कार्रवाई पर पंजाब के विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसे सीबीआई की एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करार दिया है। मजीठिया ने कहा कि यह पंजाब में भ्रष्टाचार के खेल के अंत की शुरुआत है। उन्होंने सरकार पर पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगाया। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री मान इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पंजाब की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। सीबीआई की टीम अभी भी दस्तावेजों की जांच में जुटी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।