पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं और इस बीच सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अचानक आए इन दो विधायकों के इस्तीफे से पंजाब की सियासत में हड़कंप मच गया है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है और विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम पटियाला जिले से जुड़ा हुआ है और पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले आप को यह बड़ा झटका पटियाला के हलका सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठान माजरा की ओर से दिया गया है, जिन्होंने आम आदमी पार्टी से रिजाइन कर दिया है। हरमीत सिंह पठान माजरा के इस फैसले से पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर एक बड़ा आघात पहुंचा है।
इस इस्तीफे के तुरंत बाद एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पंजाब के समाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ा माजरा ने भी आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने की औपचारिक घोषणा कर दी। चेतन सिंह जोड़ा माजरा ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि मैं चेतन सिंह जोड़ा माजरा आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देता हूं। उनके इस सार्वजनिक ऐलान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस तरह आम आदमी पार्टी के दो प्रमुख विधायकों ने आप का दामन हमेशा के लिए छोड़ दिया है।
उल्लेखनीय है कि यह राजनीतिक भूचाल ऐसे समय पर आया है जब पार्टी आगामी चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह से जुटी हुई थी और ठीक एक दिन पहले ही आप ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आम आदमी पार्टी ने 31 अक्तूबर को ही कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी कर दी थी। इस महत्वपूर्ण लिस्ट में कुल 40 लोगों के नाम शामिल किए गए थे, जिसमें खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान का नाम भी शामिल था। इस सूची से यह भी फाइनल हो चुका है कि सीएम भगवंत मान धुरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे।
इसके अलावा इस पहली लिस्ट को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी बाजार में गर्म थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आप ने जेल में बंद संजीव अरोड़ा को भी चुनावी मैदान में उतारने के लिए टिकट दे दिया था। राजनीतिक हलकों में इस बात की भी खासी चर्चा रही कि इस लिस्ट में आप ने किसी भी सिटिंग विधायक की टिकट नहीं काती थी। पार्टी ने जेल में बंद संजीव अरोड़ा को लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट से टिकट थमाई थी, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया था।
इन तमाम आंतरिक उथल-पुथल के बीच राज्य की विपक्षी पार्टियां भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई हैं। खासकर भारतीय जनता पार्टी पंजाब में पूरी तरह से एक्टिव मोड में नजर आ रही है। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी किसी भी मोर्चे पर पीछे रहना नहीं चाहती है। हाल ही में देश के गृह मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता अमित शाह ने पंजाब का दौरा किया था और अपने दौरे के दौरान उन्होंने राज्य में नशे के युवाओं में बढ़ते मामलों को बहुत ही जोर-शोर से उठाया था और अमित शाह ने अपनी सभाओं और बैठकों में इस मुद्दे को प्रमुखता से रखते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया था।
अपने पंजाब दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़े शब्दों में कहा था कि मैं चिट्टा यानी ड्रग्स से परेशान लोगों के परिवारों से मिला हूं और पंजाब की मौजूदा स्थिति को जानकर मुझे बेहद दुख हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि आप सरकार को इस हालात पर शर्म आना चाहिए। अमित शाह ने बड़े दावे करते हुए कहा था कि हम वर्ष 2029 तक पंजाब को पूरी तरह से नशा मुक्त कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंजाब के हर जिले में नशा माफिया पूरी तरह से सक्रिय है और सरकार इन पर नकेल कसने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। उन्होंने हुंकार भरी थी कि ड्रग्स माफिया को पाताल से ढूंढकर निकालेंगे और कानून के शिकंजे में कसेंगे।
गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि मैं आम आदमी पार्टी को यह याद करवाने आया हूं कि आप लोग मात्र तीन महीने में नशे के कारोबार को पूरी तरह से खत्म करने का वादा करके पंजाब की गद्दी पर बैठे थे और लेकिन आज सत्ता में आए पांच साल पूरे होने को हैं और नशा कारोबार दिन प्रतिदिन कम होने के बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि अब इस अवैध धंधे में पुलिस के सिपाही भी पकड़े जाने लगे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि आरोपियों के पास से दस से बारह किलो हेरोइन तक पकड़ी जाती है। शाह ने यह भी गंभीर आरोप लगाया था कि जो लोग इस नशे के कारोबार का खुलकर विरोध करते हैं, उन्हें मजबूरन आत्महत्या करनी पड़ती है या फिर उन्हें रास्ते से हटाने के लिए मार दिया जाता है।
इन तमाम घटनाक्रमों के बाद पंजाब की सियासत में एक बार फिर से उबाल आ गया है और एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी को चुनाव से ठीक पहले अपने दो कद्दावर विधायकों के इस्तीफे का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी कानून व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। विधायकों के पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है, जिससे आगामी चुनावों में पार्टी की रणनीतियों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन असंतुष्ट नेताओं और अंदरूनी कलह को नहीं संभाला गया, तो आने वाले दिनों में आप को और भी बड़े झटकों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल दोनों विधायकों के इस्तीफे के बाद से ही पंजाब का राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर पहुंच चुका है और हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आम आदमी पार्टी इन डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाती है और आगामी दिनों में कौन सी नई राजनीतिक चालें चली जाती हैं।